नीतीश ने सम्राट पर विश्वास कर दिया गृह मंत्रालय, बिहार में अपराध नियंत्रण पर करेंगे बेहतरीन काम: अशोक चौधरी
पटना। नीतीश कुमार ने अपनी नई सरकार में बड़ा प्रशासनिक परिवर्तन करते हुए गृह विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दी है। यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि बीते दो दशकों में यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा। बिहार की राजनीति में इसे अहम कदम माना जा रहा है और इसके पीछे कई राजनीतिक तथा प्रशासनिक संकेत देखे जा रहे हैं।
गृह विभाग सौंपने को लेकर सियासत तेज
गृह जैसा संवेदनशील और शक्तिशाली विभाग बिहार में हमेशा मुख्यमंत्री के पास रहा है। लेकिन इस बार सम्राट चौधरी को यह जिम्मेदारी देकर नीतीश कुमार ने एक बड़ा संदेश दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह निर्णय एनडीए में नई समीकरणों का हिस्सा है और इससे सम्राट चौधरी की भूमिका राज्य की राजनीति में और मजबूत होगी। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हर निर्णय सोच-समझकर लेते हैं और गृह विभाग देने के पीछे भी उनका स्पष्ट दृष्टिकोण होगा।
अशोक चौधरी ने की सम्राट की तारीफ
पटना में पत्रकारों से बात करते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि सम्राट चौधरी युवा, ऊर्जावान और तेज-तर्रार नेता हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सम्राट कठोर कदम उठाएंगे और बिहार में कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाएंगे। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री का यह फैसला रणनीतिक है और इससे सरकार के कामकाज में नई तेजी आएगी।
गृह विभाग छोड़ने पर क्या बोले जेडीयू मंत्री?
अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने 20 वर्षों में पहली बार गृह विभाग किसी अन्य को सौंपा है। यह बदलाव साधारण नहीं है और सीएम ने इस फैसले से यह संकेत दिया है कि नई सरकार में कार्यों का बंटवारा संतुलित और व्यावहारिक तरीके से होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं। ऐसे में गृह विभाग को उपमुख्यमंत्री को देने से शासन-प्रशासन की गति और मजबूत हो सकती है।
ग्रामीण कार्य विभाग की जिम्मेदारी फिर मिली
अशोक चौधरी ने ग्रामीण कार्य विभाग का कार्यभार फिर मिलने पर अपनी प्राथमिकताएँ भी स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता ग्रामीण सड़कों और आधारभूत संरचना को समय पर तैयार करना होगा। यह विभाग सीधे जनता से जुड़ा हुआ है और ग्रामीण विकास की दिशा में यह सबसे महत्वपूर्ण काम करता है। उनका कहना था कि ग्रामीण सड़कों का समयबद्ध निर्माण, मरम्मत और निगरानी उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
मंत्रिमंडल का स्वरूप और विभागों की स्थिति
नई सरकार में 26 मंत्रियों ने 20 नवंबर को शपथ ली। इनमें भाजपा से 14, जदयू से 8, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से 2, जबकि हम और आरएलएम से 1-1 मंत्री बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में कुल तीन महिलाएं और एक मुस्लिम मंत्री शामिल हैं। इस बार का कैबिनेट जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सम्राट चौधरी, जो पिछली सरकार में वित्त विभाग संभाल रहे थे, अब सीधे गृह जैसे सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का नेतृत्व करेंगे।
अपराध नियंत्रण की बड़ी चुनौती
बिहार में अपराध नियंत्रण हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। अब गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है, तो उनसे अपेक्षा भी बढ़ गई है। अशोक चौधरी का कहना है कि सम्राट नई ऊर्जा और नई नीतियों के साथ अपराध पर प्रहार करेंगे। सरकार के भीतर भी माना जा रहा है कि युवा नेतृत्व से पुलिस प्रशासन में नई सख्ती आएगी और कानून-व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
नीतीश कुमार का बड़ा राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गृह विभाग छोड़ने का नीतीश का फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह कदम संकेत देता है कि नीतीश कुमार नई सरकार में साझेदार दलों को अधिक जिम्मेदारी देकर सत्ता-संतुलन की नई रचना कर रहे हैं। इसके साथ ही सम्राट चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा की भूमिका को भी मजबूती दी गई है।
बिहार की राजनीति में हुआ बड़ा बदलाव
नीतीश कुमार द्वारा गृह विभाग सौंपने का निर्णय बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सम्राट चौधरी के सामने अब कानून-व्यवस्था सुधारने की बड़ी चुनौती है, और जेडीयू नेता अशोक चौधरी की मानें तो वे इस जिम्मेदारी पर खरे उतरेंगे। अगले कुछ महीनों में यह साफ होगा कि यह फैसला कितना प्रभावी साबित होता है और बिहार की कानून-व्यवस्था में कितना बदलाव आता है।


