एनडीए को मिली दूसरी जीत, मोकामा से अनंत सिंह जीते, वीणा देवी की करारी हार
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच शुक्रवार का दिन एनडीए गठबंधन के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण साबित हुआ। मोकामा सीट से जदयू उम्मीदवार अनंत कुमार सिंह ने शानदार जीत दर्ज की है। मतगणना की शुरुआत से ही अनंत सिंह लगातार बढ़त बनाए हुए थे और अंततः इतनी बड़ी बढ़त के साथ आगे निकल गए कि जीत लगभग तय मानी जाने लगी। मोकामा सीट का यह परिणाम एनडीए की दूसरी जीत है, जिससे गठबंधन में उत्साह और अधिक बढ़ गया है।
मोकामा सीट पर कड़ा मुकाबला
मोकामा विधानसभा सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से चर्चित रही है और इस बार भी मुकाबला बेहद रोचक था। जदयू के अनंत कुमार सिंह और राजद की प्रत्याशी वीणा देवी के बीच मुकाबले पर पूरे राज्य की नजरें थीं। शुरुआती राउंड से ही अनंत सिंह ने बढ़त बना ली थी। चुनाव आयोग द्वारा जारी रुझानों में 25 में से 23 राउंड तक अनंत सिंह 24 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे। इतनी बड़ी बढ़त ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सीट जदयू की झोली में जा रही है।
अनंत सिंह की जीत की पुष्टि
हालांकि चुनाव आयोग ने अंतिम परिणामों को तुरंत अपडेट नहीं किया था, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से बताया गया कि अनंत कुमार सिंह को जीत का सर्टिफिकेट प्रदान कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि उनकी जीत अब औपचारिक रूप से पक्की हो गई है। यह जीत इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि अनंत सिंह चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद दुलारचंद यादव हत्या मामले में जेल भेज दिए गए थे। इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई और मतदाताओं ने उन्हें भारी समर्थन दिया।
जदयू की दूसरी जीत
मोकामा से पहले केसरिया सीट पर जदयू ने अपनी पहली जीत दर्ज की थी। अब मोकामा दूसरी सीट है जहां जदयू को सफलता मिली है। यह एनडीए के भीतर जदयू की ताकत बढ़ाने वाला कारक माना जा रहा है। दोपहर 1.59 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जदयू 80 सीटों पर आगे थी जबकि बीजेपी 91 सीटों पर लीड बनाए हुए थी। इससे स्पष्ट हो गया कि यह चुनाव एनडीए के लिए मजबूत जनादेश लेकर आया है।
चुनावी प्रक्रिया में अनंत सिंह की भूमिका
अनंत सिंह इस चुनाव के चर्चित नामों में से एक रहे हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सबसे पहले नामांकन पत्र दाखिल किया था और अब वे सबसे पहले जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं। उनकी जीत यह बताती है कि मोकामा में उनका जनाधार काफी मजबूत है। जेल में होने के बावजूद मतदाताओं का समर्थन उनकी ओर जाता रहा, जिससे यह चुनावी मुकाबला और भी रोचक बन गया।
राजद की वीणा देवी की करारी हार
मोकामा सीट पर राजद ने वीणा देवी को उतारा था, लेकिन अनंत सिंह के सामने उनकी स्थिति कमजोर होती चली गई। लगातार राउंड में पीछे होने के कारण राजद को इस सीट पर करारा झटका लगा है। माना जा रहा था कि तेजस्वी यादव के आक्रामक प्रचार और लालू यादव के जनाधार से राजद को यहां लाभ मिल सकता है, परंतु परिणाम विपरीत निकले। वीणा देवी की हार महागठबंधन के समग्र प्रदर्शन को भी प्रभावित करती दिखाई देती है।
एनडीए की बढ़त और चुनावी माहौल
जैसे-जैसे रुझान सामने आए, यह स्पष्ट होने लगा कि एनडीए गठबंधन भारी बहुमत की ओर बढ़ रहा है। जदयू और बीजेपी, दोनों बड़ी संख्या में सीटों पर आगे चल रहे हैं। इससे गठबंधन कार्यकर्ताओं में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। मोकामा जैसी महत्वपूर्ण सीट पर जीत एनडीए की मनोवैज्ञानिक बढ़त को भी मजबूत करती है।
राजनीतिक महत्व
मोकामा सीट की जीत सिर्फ एक सीट का परिणाम नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में जदयू की पकड़ और अनंत सिंह की व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाती है। इस क्षेत्र में उनकी पकड़ कई वर्षों से बनी हुई है और इस चुनाव ने इसे और मजबूत कर दिया है। यह जीत आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव डाल सकती है। मोकामा से अनंत कुमार सिंह की जीत बिहार चुनाव की शुरुआती बड़ी घटनाओं में से एक है। यह परिणाम न केवल एनडीए के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आया है, बल्कि जदयू की आंतरिक मजबूती को भी दर्शाता है। अब जबकि मतगणना जारी है, राज्य की राजनीतिक तस्वीर और भी साफ होती जा रही है। मोकामा की यह जीत दिखाती है कि जनता ने स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा जताया है और स्थिर शासन के पक्ष में मतदान किया है।


