February 16, 2026

पटना में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर बीजेपी कार्यालय में भव्य समारोह, बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

  • गृहमंत्री बोले- ‘वंदे मातरम्’ आजादी के आंदोलन का राष्ट्रीय उद्घोष, इसने भारत को एकता के सूत्र में बांधा

पटना। राजधानी पटना शुक्रवार को देशभक्ति के रंग में रंग गया जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, भाजपा कार्यकर्ता और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूरा परिसर ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
वंदे मातरम्: आजादी के आंदोलन का राष्ट्रीय उद्घोष
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का स्वर है। उन्होंने कहा कि 150 वर्ष पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे रचा था, और यह गीत आगे चलकर आजादी के आंदोलन की प्रेरणा बन गया। शाह ने कहा, “जब अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से लोग टूट रहे थे, तब ‘वंदे मातरम्’ ने उनमें ऊर्जा भरी। यह गीत हमारे स्वतंत्रता संग्राम का राष्ट्रीय उद्घोष बना।”अमित शाह ने कहा कि “वंदे मातरम्” ने देश को एकता के सूत्र में बांधा। यह सिर्फ बंगाल या किसी क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे भारत का प्रतीक बन गया। “भारत कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है, यह एक संस्कृति है, एक विचार है। संस्कृति ही हमें जोड़ती है, यही हमें भारतीय बनाती है,” शाह ने कहा।
देशभर में चलेगा ‘वंदे भारत मातरम्’ अभियान
अमित शाह ने इस मौके पर घोषणा की कि देशभर में ‘वंदे भारत मातरम्’ अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत राष्ट्रीय गीत को सभी भारतीय भाषाओं में प्रचारित किया जाएगा, ताकि हर नागरिक इसकी भावना से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा और युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम होगा। गृह मंत्री ने कहा कि “आजादी के अमृतकाल” में देश को आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जरूरी है कि हर नागरिक अपने राष्ट्रगीत और राष्ट्रभक्ति के प्रतीकों से जुड़ाव महसूस करे।
पार्टी के विचार और जनसंघ की विरासत पर जोर
अमित शाह ने जनसंघ और भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा को याद करते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। “हमारे लिए राजनीति का मतलब केवल चुनाव नहीं, बल्कि देश सेवा है। जनसंघ के समय से लेकर आज तक, हमने ‘स्वदेशी’ और ‘राष्ट्रीय एकता’ के विचार को अपनाया है,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से न सिर्फ वंदे मातरम् का गौरवगान किया गया, बल्कि पार्टी ने “स्वदेशी संकल्प पत्र” भी जारी किया। इस संकल्प पत्र में लोगों से अपील की गई कि वे विदेशी वस्तुओं की जगह भारतीय उत्पादों को अपनाएं, स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को समर्थन दें, और युवाओं में स्वदेशी की भावना को मजबूत करें।
अमित शाह की बैठक: चुनावी फीडबैक और रणनीति पर चर्चा
कार्यक्रम के बाद अमित शाह ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में धर्मेंद्र प्रधान सहित कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेता मौजूद थे। इसमें पहले चरण के 121 विधानसभा क्षेत्रों की वोटिंग का फीडबैक लिया गया। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने विस्तार से उन इलाकों की समीक्षा की जहां एनडीए की स्थिति कमजोर बताई जा रही है। उन्होंने वहां के प्रत्याशियों से फोन पर सीधे बात की और रणनीतिक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही, दूसरे चरण के चुनाव प्रचार को लेकर कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। गृह मंत्री ने नेताओं से कहा कि जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों पर कायम है। “हमारे पास काम का रिकॉर्ड है, और जनता काम देखती है, न कि वादे,” उन्होंने कहा।
समारोह में गूंजा ‘वंदे मातरम्’
कार्यक्रम के दौरान पटना भाजपा कार्यालय देशभक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया। मंच पर स्कूली बच्चों ने ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया, जिससे पूरा सभागार भावनाओं से भर उठा। उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रगीत को खड़े होकर गाया और देश के प्रति समर्पण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि “वंदे मातरम्” सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर भारतीय के दिल की धड़कन है। “जब भी यह गीत गूंजता है, तब देशभक्ति की भावना अपने चरम पर होती है। इसी भावना ने हमें 200 वर्षों की गुलामी से मुक्त कराया,” उन्होंने कहा। पटना में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रवाद की भावना को पुनः जीवित करने का प्रतीक बना। अमित शाह के संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा आने वाले समय में अपने राजनीतिक संदेश को सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गौरव के साथ जोड़कर जनता तक ले जाएगी।“वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह भव्य समारोह न केवल स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाने वाला था, बल्कि यह भी संकेत था कि भाजपा आने वाले चुनावों में अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा को फिर से केंद्र में लाने की तैयारी कर चुकी है। पटना का यह दिन इतिहास में उस पल के रूप में दर्ज होगा जब राष्ट्रीय गीत ने एक बार फिर भारत की आत्मा को झंकृत किया और देशभक्ति की भावना को नई ऊर्जा दी।

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