समस्तीपुर-खगड़िया रेलखंड पर हादसा, वंदे भारत की चपेट में आकर शिक्षक की दर्दनाक मौत
समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। समस्तीपुर-खगड़िया रेलखंड पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से एक शिक्षक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक शिक्षक चुनावी ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे थे। यह हादसा गुरुवार देर रात सिंघिया घाट रेलवे स्टेशन के पास हुआ, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।
घर लौटते समय हुआ हादसा
मृतक की पहचान समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव निवासी रामसेवक बैठा के रूप में हुई है। वे हसनपुर बड़गांव मध्य विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। गुरुवार को उनकी चुनावी ड्यूटी मोहिउद्दीन नगर विधानसभा क्षेत्र में लगी थी। मतदान समाप्त होने के बाद उन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी की और ईवीएम मशीनें जमा कराईं। इसके बाद वे रात को अपने एक सहयोगी शिक्षक के घर रुके थे। शुक्रवार की सुबह जब वे घर लौटने के लिए निकले, तो सिंघिया घाट रेलवे स्टेशन की ओर पैदल जा रहे थे। बताया जा रहा है कि वे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर हसनपुर लौटने की योजना में थे। लेकिन स्टेशन पहुंचने से पहले ही पीछे से तेज रफ्तार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन आई और उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि शिक्षक को संभलने का मौका भी नहीं मिला और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पहचान चुनावी परिचय पत्र से हुई
घटना के बाद आसपास के ग्रामीण और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंचे। मृतक की जेब से चुनावी ड्यूटी से संबंधित परिचय पत्र और अन्य दस्तावेज मिले, जिनसे उनकी पहचान की गई। बाद में स्थानीय थाने को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही हसनपुर थाना क्षेत्र में उनके परिजनों के बीच कोहराम मच गया। मृतक के भाई तारकेश्वर बैठा ने बताया कि “मेरे भाई रामसेवक बड़गांव मध्य विद्यालय में तैनात थे। वे हमेशा अपनी ड्यूटी को लेकर गंभीर रहते थे। चुनावी ड्यूटी के बाद घर लौटते वक्त यह हादसा हो गया। हमें यह खबर मिलने के बाद विश्वास ही नहीं हुआ कि वे अब हमारे बीच नहीं रहे।”
पुलिस ने किया शव को कब्जे में
घटना की जानकारी मिलते ही रेल थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर बीपी आलोक दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, “प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह हादसा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से हुआ है। मृतक ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मारे गए। मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।” रेलवे पुलिस ने यह भी बताया कि शव ट्रैक से कुछ दूरी पर मिला है, जिससे संकेत मिलता है कि मृतक संभवतः ट्रैक पार करने की कोशिश कर रहे थे या फिर ट्रेन के गुजरने का अंदाजा नहीं लगा पाए।
हादसे के बाद फैला शोक
इस हादसे की खबर मिलते ही मृतक के गांव शंकरपुर में मातम छा गया। शिक्षक समुदाय और ग्रामीणों ने रामसेवक बैठा की मौत को बड़ी क्षति बताया। ग्रामीणों का कहना है कि वे बेहद मिलनसार और जिम्मेदार व्यक्ति थे। गांव के लोगों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। एक अधिकारी ने बताया कि “रामसेवक बैठा एक कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे। उन्होंने चुनावी ड्यूटी ईमानदारी से निभाई और लौटते समय यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया। विभाग परिवार की हर संभव मदद करेगा।”
रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा को लेकर सवाल
यह घटना एक बार फिर रेलवे ट्रैक की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग स्टेशन तक पहुंचने या सड़क पार करने के लिए रेलवे लाइन का उपयोग करते हैं। कई जगहों पर अंडरपास या ओवरब्रिज नहीं होने के कारण लोग जोखिम उठाकर ट्रैक पार करते हैं, जिससे इस तरह के हादसे होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंघिया घाट स्टेशन के पास भी कोई फेंसिंग नहीं है और वहां से लोग अक्सर ट्रैक पार करते हैं। उन्होंने रेलवे प्रशासन से वहां सुरक्षा बाड़ लगाने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने की मांग की है।
चुनाव ड्यूटी के बाद लगातार हादसों का सिलसिला
चुनावी ड्यूटी के दौरान या उसके बाद शिक्षकों और कर्मचारियों की दुर्घटनाओं की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में कई बार सामने आ चुकी हैं। कई बार लंबी ड्यूटी और थकान के कारण ऐसे हादसे होते हैं। प्रशासन ने पहले भी चुनावी कर्मियों को सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं होती जा रही हैं। रामसेवक बैठा की मौत न केवल उनके परिवार के लिए गहरा सदमा है, बल्कि यह घटना चुनावी ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। यह हादसा बताता है कि थोड़ी-सी लापरवाही या असावधानी कैसे किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और रेलवे विभाग को भी ट्रैक पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जब तक इन घटनाओं की जड़ पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे हादसे रुकने की संभावना कम है। फिलहाल, हसनपुर के शंकरपुर गांव में हर आंख नम है। लोगों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है — “क्या अब भी रेलवे ट्रैक सुरक्षित है?”


