January 17, 2026

प्रदेश में मोन्था चक्रवात का असर, पटना समेत 4 जिलों में बारिश, 26 जिलों में अलर्ट जारी

  • कई जिलों में तेज हवाओं का असर: बांका में घरों में घुसा पानी, खगड़िया में प्रियंका गांधी की जनसभा रद्द

पटना। बिहार इन दिनों चक्रवात ‘मोन्था’ के प्रभाव से गुजर रहा है। इस चक्रवात का असर पूरे राज्य में अलग-अलग रूप में देखा जा रहा है। कहीं तेज बारिश और हवाएं लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही हैं, तो कहीं किसानों की फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो रही हैं। मौसम विभाग ने कई जिलों में अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
चक्रवात का असर और बारिश की स्थिति
शुक्रवार की सुबह से ही पटना सहित कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया। पटना में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि समस्तीपुर, बेगूसराय और बेतिया में बूंदाबांदी के साथ तेज हवा चली। विभिन्न शहरों में बारिश का स्तर अलग-अलग रहा। सुपौल में पिछले 24 घंटे में 65.4 मिलीमीटर और फारबिसगंज में 31.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बांका जिले में भारी बारिश के कारण रजौन बाजार क्षेत्र के कई घरों में पानी घुस गया। लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी होने लगी। इसी तरह बक्सर और आसपास के इलाकों में दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे धान और सब्जी की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
झीलों और नदियों के जलस्तर में वृद्धि
कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति बन गई है। नदी के किनारे स्थित गांवों में लोगों को सतर्क किया गया है। प्रशासन ने नावों और राहत दलों को भी तैयार रखा है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा सके।
मौसम विभाग की चेतावनी और अलर्ट
मौसम विभाग ने बिहार के 26 जिलों में अलर्ट जारी किया है। इसमें 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 19 जिलों में यलो अलर्ट घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। आसमान में बादल छाए रहने और तापमान में गिरावट की भी संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि चक्रवात मोन्था बंगाल की खाड़ी से निकलकर उत्तर बिहार और सीमांचल के जिलों की ओर बढ़ रहा है। शुक्रवार रात से शनिवार तक बारिश की तीव्रता और भी बढ़ सकती है।
किसानों को जारी की गई सलाह
लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने की समस्या बढ़ गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की निकासी व्यवस्था ठीक रखें। खुले में कटाई या सुखाने का काम फिलहाल टालने की सलाह दी गई है। धान की कटाई वाले जिले इस बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई क्षेत्रों में किसानों की मेहनत पानी में बहती नजर आ रही है।
खराब मौसम का चुनावी सभाओं पर असर
चक्रवात और बारिश का असर बिहार की चुनावी हलचल पर भी दिखाई दे रहा है। खगड़िया में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की निर्धारित सभा खराब मौसम की वजह से रद्द कर दी गई। इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दो सभाएं, तेजस्वी यादव की तीन सभाएं और चिराग पासवान की दो रैलियां भी रद्द करनी पड़ी हैं। भोजपुर और औरंगाबाद में मांझी, सुशील मोदी और रामनाथ ठाकुर जैसे नेताओं के कार्यक्रम भी कैंसिल कर दिए गए। दरभंगा में मनोज तिवारी और गया में इमरान प्रतापगढ़ी के कार्यक्रम भी नहीं हो सके। पप्पू यादव की किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया की सभाएं भी रद्द कर दी गईं।
राजनीतिक गतिविधियों पर प्रभाव
चुनाव के बीच कार्यक्रमों का रद्द होना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बन रहा है। नेताओं को अब वैकल्पिक रणनीति अपनानी पड़ सकती है, जैसे कि वर्चुअल सभा या सीमित उपस्थिति वाले छोटे कार्यक्रम। हालांकि, चुनावी रणनीतिकारों का कहना है कि मौसम स्थिर होने के बाद प्रचार का दबाव और अधिक बढ़ जाएगा।
मौसम में संभावित बदलाव
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 2 नवंबर से मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा। इसके बाद न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है। रात और सुबह के समय ठंड का असर बढ़ेगा और सर्दियों की शुरुआत स्पष्ट रूप से महसूस होने लगेगी। चक्रवात मोन्था ने बिहार के मौसम, कृषि, जनजीवन और चुनावी कार्यक्रमों पर गहरा प्रभाव डाला है। बारिश और तेज हवाओं से जहां किसान चिंतित हैं, वहीं आम लोग भी दिनचर्या में बदलाव का सामना कर रहे हैं। प्रशासन और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल सतर्कता ही सबसे बड़ी जरूरत है।

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