पटना में अनियंत्रित पुलिस गश्ती वाहन झोपड़ी में घुसी, मची अफरा-तफरी, एक को लोगों ने पकड़ा
पटना। राजधानी पटना में मंगलवार की देर रात एक अजीबोगरीब लेकिन गंभीर घटना ने लोगों को चौंका दिया। पटना सिटी के बाइपास थाना क्षेत्र के कदमतल मोहल्ले में पुलिस की एक गश्ती गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी एक झोपड़ी में जा घुसी। हादसे में झोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह से टूट गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और देर रात तक हंगामे का माहौल बना रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा रात करीब 11 बजे के आसपास हुआ, जब इलाके में छठ पर्व को लेकर लोग अपने-अपने घरों के पास सजावट और तैयारियों में जुटे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आती हुई पुलिस गश्ती वाहन अनियंत्रित होकर झोपड़ी में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग दहशत में बाहर निकल आए। कई लोग यह समझ ही नहीं पाए कि आखिर पुलिस की गाड़ी झोपड़ी में कैसे जा टकराई। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद गश्ती दल में शामिल कुछ पुलिसकर्मी मौके से हट गए। इस बीच, भीड़ ने गाड़ी में मौजूद एक व्यक्ति को पकड़ लिया, जो सिविल वर्दी में था और गाड़ी चला रहा था। लोगों ने उसका घेराव किया और मौके पर कड़ी नाराजगी जताई। हादसे की जानकारी मिलते ही बाइपास थाना प्रभारी राजेश कुमार झा मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी बेगमपुर टीओपी (टाउन आउट पोस्ट) की थी, जो छठ पर्व को लेकर पूरे दिन और रात गश्त पर थी। देर रात गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी झोपड़ी में घुस गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। थाना प्रभारी ने कहा, “घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन राहत की बात यह है कि कोई जान-माल की क्षति नहीं हुई है। झोपड़ी को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।” वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि गाड़ी को एक निजी चालक चला रहा था, जो पुलिस का कर्मी नहीं था। वे यह भी कह रहे हैं कि वाहन चालक न तो पुलिस की वर्दी में था और न ही उसके पास पहचान संबंधी कोई दस्तावेज था। इस वजह से लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने मौके पर हंगामा किया। भीड़ ने चालक को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “गाड़ी इतनी तेज रफ्तार में थी कि अगर झोपड़ी के अंदर लोग सोए होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक गया है।” दूसरी ओर, कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर पुलिस की गश्ती गाड़ी को कोई बाहरी व्यक्ति कैसे चला सकता है। उनका कहना है कि यह सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों के स्तर पर गंभीर लापरवाही है। हादसे के बाद पुलिस ने वाहन को मौके से हटाया और आसपास के लोगों से बयान दर्ज किए। घटना स्थल की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गए, जिनमें गाड़ी झोपड़ी के अंदर फंसी हुई नजर आ रही है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, झोपड़ी में रहने वाला परिवार हादसे के समय बाहर था, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि, झोपड़ी के टूटने से परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। इस पूरे मामले ने पटना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और गश्ती प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि यदि सरकारी गश्ती वाहन को अस्थायी या निजी ड्राइवरों से चलवाया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। फिलहाल, बाइपास थाना पुलिस ने वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और वाहन के नियंत्रण खोने के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि वाहन का मैकेनिकल निरीक्षण कराया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या लापरवाही से। कदमतल इलाके के लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब गश्ती वाहन की लापरवाही से दुर्घटना हुई हो। उन्होंने मांग की है कि पुलिस प्रशासन गश्त के दौरान अधिक सावधानी बरते और निजी चालकों को सरकारी गाड़ियों से दूर रखे। रातभर चली इस अफरा-तफरी के बाद अब क्षेत्र में शांति है, लेकिन घटना ने पुलिस की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।


