January 29, 2026

पटना में डायल-112 के चालकों ने सड़क पर किया प्रदर्शन, कई मांगों को लेकर जमकर की नारेबाजी, हड़ताल की चेतावनी

पटना। पटना में डायल 112 सेवा से जुड़े चालकों ने अपनी कई मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया। मंगलवार को गर्दनीबाग से कारगिल चौक तक पूर्व सैनिकों ने मार्च निकाला। इस दौरान वे हाथों में तिरंगा लेकर नारेबाजी करते दिखाई दिए। “बिहार सरकार होश में आओ” और “बिहार सरकार शर्म करो” जैसे नारे लगाकर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष चन्दन कुमार ने बताया कि पूरे बिहार से समर्थन मिल रहा है और विभिन्न जिलों से पूर्व सैनिक पटना पहुँचकर प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बुधवार से पूरे बिहार में काम बहिष्कार किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि कोई पूर्व सैनिक जो डायल 112 में चालक के रूप में काम कर रहा है, वह ड्यूटी पर नहीं जाएगा और पूरे राज्य में चक्का जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
चालकों की मुख्य समस्याएँ
चालकों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा। चन्दन कुमार और उपाध्यक्ष धीरज कुमार यादव ने बताया कि इन चालकों की नियुक्ति 25,000 रुपए मासिक वेतन पर की गई थी, लेकिन अब तक मात्र 750 रुपए की वृद्धि ही हुई है। उन्होंने कहा कि बहाली के समय सरकार की तरफ से कई आश्वासन दिए गए थे, जैसे कि घर से 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में ड्यूटी दी जाएगी, साल में 20 दिन की छुट्टी मिलेगी, साप्ताहिक छुट्टी मिलेगी, और सभी कर्मचारियों का बीमा किया जाएगा। लेकिन इन आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ। छुट्टी मिलने के बावजूद उन्हें थाने से रिलीवर नहीं किया जाता है। महिलाओं को 12-12 घंटे की ड्यूटी दी जा रही है। कई बार उन्हें छोटे बच्चों को गोद में लेकर ड्यूटी करनी पड़ती है। इससे उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं।
चालकों की माँगें
डायल 112 के चालकों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि सभी चालकों को पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र दिया जाए। तबादला का भत्ता मिलना चाहिए और तबादला म्यूचुअल होना चाहिए। समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। साप्ताहिक छुट्टी सुनिश्चित हो। चालक संघ को अपना संगठन बनाने की अनुमति दी जाए। राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए और दूसरे राज्यों के तर्ज पर वेतनमान लागू किया जाए। इन मांगों को लेकर चालकों ने कहा कि यदि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो वे और बड़ा आंदोलन करेंगे।
सेवा की जिम्मेदारियाँ और हालात
डायल 112 सेवा को प्रभावी बनाने के लिए भूतपूर्व सैनिकों की नियुक्ति 21 जनवरी 2022 को की गई थी। तब से ये सभी चालक सेवा में हैं और लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। इसके बावजूद इनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। संगठन ने बताया कि सेवा के दौरान अब तक 15 जवानों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन किसी भी प्रकार की सुविधा या वेलफेयर उन्हें नहीं मिला है। यह स्थिति उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर रही है। कई बार वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा चुके हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सरकार से अपील
चालकों ने सरकार से अपील की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। उन्हें सम्मान और उचित सुविधाएँ मिलनी चाहिए ताकि वे सेवा में बेहतर योगदान दे सकें। यह भी कहा गया कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो पूरे राज्य में सेवा ठप हो सकती है, जिससे आम जनता को परेशानी होगी। उनका मानना है कि यदि उनकी जायज मांगें पूरी की जाएँगी तो वे सेवा को और बेहतर ढंग से निभा सकेंगे और जनता को त्वरित सहायता प्रदान कर पाएंगे। इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सरकार के सामने यह चुनौती बन गई है कि वह चालकों की समस्याओं का समाधान कर उनकी सेवा को सुगम बनाए।

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