January 28, 2026

बिजली कटौती के खिलाफ पटना में महिलाओं का हल्ला बोल, ऑफिस का किया घेराव, सीएम के खिलाफ नारेबाजी

पटना। जहां एक ओर बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी “125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना” आज रात से पूरे प्रदेश में लागू होने जा रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी पटना में कई इलाकों में बिजली संकट ने लोगों की नींद उड़ा दी है। खासकर पटना सदर के सबलपुर पंचायत स्थित फतेहजंगपुर गांव में बीते चार-पांच दिनों से लगातार बिजली की आंखमिचौली से लोग परेशान हैं। इन हालातों से नाराज़ होकर गुरुवार को दर्जनों महिलाओं ने दिदारगंज पावर सब स्टेशन का घेराव कर जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान महिलाएं मुखर होकर न केवल बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करती दिखीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी जमकर कोसा। महिलाओं ने आक्रोश जताते हुए गीत के माध्यम से अपना गुस्सा प्रकट किया। गीत की पंक्तियां थीं— “जब से नीतीश कुमार बिजली फ्री करबईलन, बिजली कटबाके अंधारा में रखबईलन नीतीश कुमार…”। इन पंक्तियों के जरिए महिलाओं ने बताया कि मुफ्त बिजली योजना की घोषणा के बाद से ही गांव में बिजली पूरी तरह से नदारद है। स्थानीय महिला प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से ट्रांसफार्मर जला हुआ है, जिसकी बार-बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। गांव में न तो रात में बिजली रहती है, न दिन में। इससे नल से पानी भी नहीं आ रहा और बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि लगातार अंधेरे में रहने से बच्चों की तबीयत भी बिगड़ रही है और गर्मी में बुजुर्गों की हालत खराब हो रही है।इस विरोध प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी शक्ति पासवान ने कहा, “जब से सरकार ने मुफ्त बिजली देने की योजना लागू की है, तब से बिजली का संकट और गहराता जा रहा है। बिजली न होने के कारण अस्पताल जाने की नौबत आ रही है। नीतीश कुमार ने फ्री बिजली के नाम पर जनता को अंधेरे में धकेल दिया है। उधर, दिदारगंज पावर सब स्टेशन के एसडीओ राजेश कुमार ने महिलाओं के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि “महिलाएं गलत आरोप लगा रही हैं। ट्रांसफार्मर बीते शाम ही जला है और अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। उसे बदलने की प्रक्रिया तेजी से की जा रही है।हालांकि, ग्रामीण महिलाओं की बात कुछ और ही बयां कर रही है। उनका दावा है कि वे बीते चार से पांच दिनों से बिजली के लिए संघर्ष कर रही हैं, और अब तंग आकर उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। यह मामला उन क्षेत्रों की हकीकत उजागर करता है जहां मुफ्त बिजली योजना की घोषणा तो हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर बिजली आपूर्ति की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। सरकार की यह योजना तभी सफल हो सकती है जब तकनीकी संसाधन, रखरखाव और आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ हो। फिलहाल गांव की महिलाएं तब तक चैन से बैठने को तैयार नहीं हैं जब तक बिजली की व्यवस्था सुधर नहीं जाती और ट्रांसफार्मर को बदला नहीं जाता। उनका साफ कहना है कि वे रोजाना इसी तरह का विरोध करेंगी अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ। यह घटना सरकार के लिए एक चेतावनी है कि केवल योजनाओं की घोषणा से काम नहीं चलेगा, उन्हें सही तरीके से लागू करना और ज़मीनी हालात सुधारना ज़रूरी है।

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