January 28, 2026

विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में विधायकों को दी नसीहत, कहा- आपके बच्चे देख रहे, वह क्या सोचेंगे, आचरण बदलें

पटना। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र अपने अंतिम दिन भी शांतिपूर्वक नहीं चल पाया। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्य काले कपड़े पहनकर सदन में पहुंचे और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ गलत व्यवहार तथा एसआईआर के मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। इसके चलते विधानसभा की कार्यवाही महज पांच मिनट और विधान परिषद की कार्यवाही केवल दस मिनट ही चल सकी।
विपक्षी विधायकों ने टेबल पलटने की कोशिश की
हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्य इतने आक्रोशित दिखे कि उन्होंने सदन के टेबल को पलटने की भी कोशिश की। उन्होंने पहले विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और फिर सदन की कार्यवाही में भाग लेने पहुंचे। लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही उन्होंने जोरदार शोरगुल शुरू कर दिया। उनकी मांगों और नाराजगी को लेकर सदन का वातावरण पूरी तरह अशांत हो गया।
स्पीकर की सधी हुई समझाइश
इस अशांति के बीच विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने विपक्षी विधायकों को संयम बरतने और आचरण में सुधार लाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही देखने के लिए स्कूल के बच्चे भी आए हैं। वे देख रहे हैं कि उनके जनप्रतिनिधि किस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं। स्पीकर ने विधायकों से कहा कि यह प्रश्नकाल आपका ही समय है, इसे यूँ ही बर्बाद मत कीजिए। उन्होंने अपील की कि सदन की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई आचरण न करें जिससे लोगों का विश्वास लोकतंत्र से उठे।
नीतीश कुमार का विपक्ष पर पलटवार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्य हर दिन काला कपड़ा पहनकर आते हैं, जो परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पहले कभी सभी दलों के सदस्य एक जैसे कपड़े पहनकर आए थे? उन्होंने विपक्ष को उल्टा-सीधा कहने और निरर्थक विरोध करने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि सरकार ने जो काम किया है, उसका लाभ विपक्षी क्षेत्र के लोग भी ले रहे हैं।
लोकतंत्र में गरिमा का महत्व
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात स्पष्ट हुई कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में मर्यादा और आचरण का विशेष महत्व होता है। जब विधायकों का व्यवहार असंयमित हो जाता है, तो उसका प्रभाव समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी पर पड़ता है। विधानसभा जैसे पवित्र मंच पर यदि प्रतिनिधि अनुशासनहीनता दिखाते हैं, तो जनता का विश्वास कमजोर होता है।
बच्चों की उपस्थिति में हुआ अव्यवहार उचित नहीं
जिस प्रकार से स्पीकर ने यह कहा कि बच्चे देख रहे हैं, वह इस बात की ओर संकेत करता है कि लोकतंत्र की शिक्षा केवल किताबों से नहीं, व्यवहार से भी मिलती है। जब बच्चे अपने प्रतिनिधियों को शालीनता और गंभीरता के साथ चर्चा करते हुए देखते हैं, तो उनके मन में लोकतंत्र के प्रति विश्वास और आदर बढ़ता है। लेकिन जब वे हंगामा, अपशब्द और मारपीट जैसा आचरण देखते हैं, तो वे भ्रमित होते हैं। बिहार विधानसभा का यह सत्र भी राजनीतिक खींचतान और विरोध के बीच समाप्त हो गया। विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध के तरीकों में संयम और गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। स्पीकर की यह टिप्पणी कि “बच्चे देख रहे हैं”, न केवल एक नसीहत है, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की एक सशक्त अपील भी है। विधानसभा को एक अनुशासित मंच बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी जनप्रतिनिधियों की है, ताकि लोकतंत्र की नींव मजबूत बनी रहे।

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