मानसून सत्र के तीसरे दिन विपक्ष का हंगामा, सीएम के खिलाफ लगाए नारे, दूसरे रास्ते से सदन पहुंचे नीतीश
पटना। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र इन दिनों खासा विवादों में घिरा हुआ है। तीसरे दिन की कार्यवाही भी भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई, जहां विपक्षी दलों ने काले कपड़े पहनकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद ने सत्र की कार्यवाही को बार-बार बाधित किया, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक को विपक्ष के विरोध के चलते मुख्य द्वार से सदन में प्रवेश नहीं मिल सका।
मुख्य द्वार पर लगा विरोध का पहरा
सत्र के तीसरे दिन की शुरुआत से ही विपक्षी विधायकों ने विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार को बैनर और पोस्टर के साथ घेर लिया। वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सदन में प्रवेश करने से रोकने लगे। विपक्ष की इस घेराबंदी के कारण मुख्यमंत्री को मजबूर होकर दूसरे रास्ते से विधानसभा कक्ष में प्रवेश करना पड़ा।
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण बना केंद्र बिंदु
विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। विपक्षी दलों के अनुसार करीब 52 लाख नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं, जिनमें अधिकतर गरीब, पिछड़े, अति पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल हैं। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी विधायक लगातार चर्चा की मांग कर रहे हैं, लेकिन सदन में इसे अनुमति नहीं मिल रही है, जिसके चलते वे आंदोलन के रूप में विरोध कर रहे हैं।
काले कपड़ों में पहुंचे महागठबंधन के विधायक
तीसरे दिन के प्रदर्शन को प्रतीकात्मक बनाने के लिए महागठबंधन के सभी विधायक काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे। इससे पहले भी वे इस मुद्दे को लेकर लगातार विरोध जता रहे थे, लेकिन तीसरे दिन का प्रदर्शन अधिक संगठित और उग्र रूप में सामने आया। विपक्ष का यह कहना है कि जब तक मतदाता सूची में हुई कथित अनियमितताओं पर विधानसभा में चर्चा नहीं कराई जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
विपक्षी नेताओं के तीखे आरोप
कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने खुद माना है कि लाखों नाम सूची से हटाए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि विपक्ष का आरोप झूठा नहीं था। उनका दावा है कि यह पूरा अभियान पूर्वाग्रह से प्रेरित है और इसमें भाजपा की भूमिका स्पष्ट है। उन्होंने चुनाव आयोग को भाजपा का एजेंट तक करार दे दिया और कहा कि यह केवल लोकतंत्र बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि आर-पार की लड़ाई बन गई है।
राजनीतिक माहौल और आने वाले संकेत
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को गर्म कर दिया है। विपक्ष की ओर से लगातार सरकार और आयोग पर हमले किए जा रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और आरजेडी विधायक राकेश रोशन ने भी सरकार पर तीखे प्रहार किए और विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र मतदाता सूची की अनियमितताओं के सवाल पर विपक्ष और सरकार के बीच सीधी टकराव का मंच बन गया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए उठे ये सवाल केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आम जनता की जागरूकता और अधिकारों से भी जुड़ते दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विरोध किस दिशा में जाता है और क्या सरकार विपक्ष की मांगों को मानते हुए सदन में चर्चा के लिए तैयार होती है या नहीं।


