January 29, 2026

भाजपा ने नीतीश के लिए की बड़ी मांग, बचौल बोले- उपराष्ट्रपति के लिए नीतीश सबसे योग्य, बिहार को मिले गौरव

पटना। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। उनके अचानक इस्तीफे की सूचना सामने आने के बाद न सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा शुरू हो गई है, बल्कि संभावित नए उपराष्ट्रपति के नामों पर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। धनखड़ ने अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है, जबकि उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक बचा हुआ था। इससे यह संदेह भी उभर रहा है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक मतभेद या असहमति रही हो सकती है।
नीतीश कुमार के नाम की वकालत
इन तमाम अटकलों के बीच बिहार से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान सामने आया है। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम को उपराष्ट्रपति पद के लिए सबसे उपयुक्त बताया है। यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि यह मांग नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की ओर से नहीं, बल्कि उसकी सहयोगी भाजपा के एक वरिष्ठ विधायक द्वारा रखी गई है।
नीतीश का अनुभव और योग्यता
ठाकुर बचौल का कहना है कि नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की सेवा कर रहे हैं और उनके पास राजनीति, प्रशासन तथा संसदीय प्रक्रियाओं का गहरा अनुभव है। उन्होंने कहा कि यदि नीतीश को उपराष्ट्रपति बनाया जाता है तो वह राज्यसभा की गरिमा को बनाए रखने के साथ-साथ सांसदों को अपने अनुभव से लाभान्वित कर सकेंगे। ठाकुर ने यह भी जोड़ा कि नीतीश कुमार के उपराष्ट्रपति बनने से बिहार को भी राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान और गौरव मिलेगा।
बिहार की राजनीति में उठे सवाल
इस बयान के सामने आते ही बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। हालांकि, जदयू की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इस बयान को एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखना शुरू कर दिया है। बिहार विधानसभा में विपक्ष पहले ही मतदाता पुनरीक्षण अभियान को लेकर सरकार पर हमलावर है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और राज्य में चल रहे मतदाता सत्यापन कार्य को तुरंत रोकने की मांग की।
धनखड़ के इस्तीफे की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ अगस्त 2022 में देश के उपराष्ट्रपति बने थे। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे, जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कई बार टकराव में रहने के कारण सुर्खियाँ बटोरी थीं। उनके इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारण बताए गए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि शीर्ष नेतृत्व से मतभेद की वजह से उन्होंने पद छोड़ दिया।
राजनीतिक संकेत या वास्तविक प्रस्ताव?
भाजपा विधायक की यह मांग केवल व्यक्तिगत मत है या पार्टी स्तर पर कोई रणनीति है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है। लेकिन इतना तय है कि नीतीश कुमार के उपराष्ट्रपति बनने की अटकलें यदि आगे बढ़ती हैं तो बिहार की सियासी तस्वीर एक बार फिर बदल सकती है। यह भी देखा जाएगा कि नीतीश खुद इस संभावना पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, क्योंकि वह पहले भी कई बार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद की चर्चाओं से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए नीतीश कुमार के नाम का सामने आना न केवल बिहार की राजनीति को बल्कि केंद्र की सियासत को भी प्रभावित कर सकता है। यह देखना रोचक होगा कि भाजपा इस प्रस्ताव को लेकर आगे क्या रुख अपनाती है और जदयू इसमें कितनी गंभीरता दिखाती है। धनखड़ के इस्तीफे से खाली हुए पद को भरने के लिए आने वाले दिनों में राजनीतिक जोड़-तोड़ और मंथन तेज होने की संभावना है।

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