February 13, 2026

शराब घोटाले मामले में केजरीवाल और सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ी, ईडी को मिली केस चलाने की अनुमति

नई दिल्ली। दिल्ली के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति गृह मंत्रालय से प्राप्त कर ली है। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और दिल्ली की राजनीति में यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी भी सार्वजनिक सेवक पर मुकदमा चलाने के लिए संबंधित प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य है। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई मंजूरी के बाद अब ईडी इस मामले को और तेजी से आगे बढ़ा सकेगी। ईडी ने अपनी चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल को इस घोटाले का मास्टरमाइंड और किंगपिन बताया है। ईडी का दावा है कि 2021-22 में दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में बदलाव कर साउथ लॉबी को लाभ पहुंचाया गया। इसके तहत कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई। इसमें से 45 करोड़ रुपये का उपयोग आम आदमी पार्टी ने गोवा विधानसभा चुनाव प्रचार में किया। ईडी ने मार्च 2023 में अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया और मई में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। अरविंद केजरीवाल ने चार्जशीट के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसे रद्द करने और इस पर रोक लगाने की मांग की थी। वहीं, आम आदमी पार्टी का कहना है कि शराब नीति मामले में कोई ठोस सबूत अभी तक पेश नहीं किया गया है। पार्टी ने इस मामले को राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। राजधानी में आगामी 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं, और यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। ईडी की कार्रवाई और घोटाले के आरोपों से पार्टी की छवि पर असर पड़ सकता है। हालांकि, पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। इस मामले ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है। ईडी की चार्जशीट और गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद, अब न्यायिक प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल इसे आम आदमी पार्टी की छवि धूमिल करने का मौका मान रहे हैं। शराब घोटाले से जुड़ा यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। केजरीवाल और सिसोदिया पर लगे आरोप न केवल उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि दिल्ली चुनाव में पार्टी की साख पर भी असर डाल सकते हैं। अब यह देखना होगा कि न्यायालय में इस मामले का क्या निष्कर्ष निकलता है।

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