आम बजट पर बिहार में विपक्षी पार्टियों ने कुछ इस तरह की दी प्रतिक्रिया
पटना। विपक्ष ने केंद्रीय बजट 2020-21 को जनता को निराश करनेवाला और दिशाहीन बजट बताया है। किसी ने कहा कि वर्तमान विकास दर कम है, जबकि अगले वित्तीय वर्ष में 10 प्रतिशत करने का सपना दिखाया गया है. तो किसी ने बजट को केंद्र सरकार पर आम जन को धोखा देने का आरोप लगाया है।
आंख बंद-डिब्बा गायब जैसा है ये बजट : अब्दुल बारी सिद्दीकी
बिहार के पूर्व वित्त मंत्री एवं राजद विधायक अब्दुल बारी सिद्दीकी ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर आम जन को धोखा देने का आरोप लगाया है। बिहार विधानसभा में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर हुई बहाली का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार, विशेषकर शिक्षा के अनुसार रोजगार के लिये कुछ नहीं है। निजीकरण कर नौकरी कम की जा रही हैं। महंगाई कम नहीं की। जूता- चप्पल पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी। खेतिहर मजदूर को क्या दिया, वेयर हाउसिंग खोलेंगे, लेकिन अनाज के लिये मार्केट नहीं बनाया। कहा कि बजट में घोषणा तक अधूरी है। बात देने की कही गयी, लेकिन हकीकत में वे जेब से पैसा वसूल रहे हैं।
बजट ने बिहार के लोगों को मायूस किया: उपेंद्र कुशवाहा
रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने आम बजट को युवा व जनविरोधी बताते हुए कहा कि बजट ने बिहार के लोगों को मायूस किया है। हमें बजट से उम्मीद थी कि बिहार में डबल इंजन की सरकार विकास की पटरी पर दौड़ेगी, लेकिन बजट ने बिहार की डबल इंजन की सरकार को बुरी तरह डिरेल कर दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य व शिक्षा के बजट में बिहार की अनदेखा करने पर नाराजगी जतायी और कहा कि केंद्र सरकार बिहार के साथ सौतेला रवैया अपना रही है।
जनता को निराश करने वाला है बजट : सदानंद सिंह
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि संसद में पेश केंद्रीय बजट जनता को निराश करने वाला है। बजट में नये रोजगार की कोई बात नहीं की गयी है। विकास दर वर्तमान में पांच फीसदी से भी कम होने की संभावना है। उसे अगले वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत करने की बात हकीकत से हटकर दिवास्वप्न जैसा है। इस बजट से बाजार में भी निराशा हुआ है। उन्होंने कहा कि आयकर में थोड़ी बहुत छूट है परंतु पिछले करीब 70 रियायतों को छोड़ने के बाद। मेडिकल इक्विपमेंट, आॅटोपार्ट्स महंगे होने से मेडिकल और आॅटो सेक्टर उबर नहीं पायेंगे। श्री सिंह ने कहा कि यह बजट रेलवे, एलआईसी, एडीबीआई और अन्य सरकारी विभाग/कंपनियों के प्राइवेटाईजेशन को बढ़ावा देने वाला है। केंद्र सरकार एलआईसी, एडीबीआई में अपनी हिस्सेदारी को बेचने जा रही है। रेल गाड़ियों को चलाने, स्टेशनों के विकास, मेडिकल कॉलेज के निर्माण आदि सभी में निजीकरण को शामिल किया जा रहा है।


