भवन निर्माण विभाग के ऑफिस में ओपन टेंडर को लेकर मारपीट, युवक घायल, महिला से छेड़खानी का आरोप
पटना। शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र में शनिवार को भवन निर्माण विभाग के कार्यालय में ओपन टेंडर प्रक्रिया के दौरान बड़ा विवाद सामने आया। यह घटना राजवंशी नगर स्थित विभाग के परिसर में सुबह करीब 11:30 बजे हुई। इस घटना में मारपीट और छेड़खानी की शिकायत दर्ज की गई है। घटना की शुरुआत तब हुई जब टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने आईं संजना झा ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनके साथ बदसलूकी और छेड़खानी की। संजना झा के मुताबिक, वह अपने सहयोगियों के साथ टेंडर में भाग लेने पहुंची थीं। इसी दौरान परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। इस हमले में संजना झा के साथ आए सन्नी कुमार और आशीष कुमार को गंभीर चोटें आईं। सन्नी कुमार के सिर में गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा, जबकि आशीष की आंख और गर्दन पर चोटें आईं। संजना झा का दावा है कि हमला करने वाले व्यक्तियों, संजीव यादव और सत्येंद्र सिंह टुनटुन, से उनकी कोई पूर्व पहचान नहीं थी। संजना के पति, अमन कुमार झा ने बताया कि उनकी पत्नी को पहले से ही धमकी मिल रही थी। टेंडर प्रक्रिया से एक दिन पहले भी धमकी दी गई थी, लेकिन इसे उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। अमन झा के अनुसार, घटना के समय परिसर में काफी भीड़ थी और सुरक्षा के लिए कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।घटना के बाद, संजना झा ने शास्त्रीनगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने मारपीट और छेड़खानी का आरोप लगाया है। थानाध्यक्ष अमर कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। उन्होंने भीड़ को परिसर से बाहर कर दिया। पुलिस का कहना है कि पीड़ितों की ओर से दी गई शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मारपीट और छेड़खानी के आरोपों की सत्यता की पुष्टि के लिए पुलिस तथ्यों का विश्लेषण कर रही है। इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में टेंडर प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर कर दिया है। टेंडर प्रक्रिया में आमतौर पर कई समूहों की भागीदारी होती है, जिससे तनाव का माहौल बन सकता है। ऐसी स्थितियों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से विवाद और हिंसा की संभावना बढ़ जाती है। इस घटना ने भवन निर्माण विभाग की टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच के नतीजों के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह मामला सरकारी कार्यप्रणाली में सुधार और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।


