जयप्रकाश नारायण की 101वीं जयंती पर पटना राजकीय समारोह आयोजित, मुख्यमंत्री श्रद्धांजलि देकर किया नमन
पटना। भारत में इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के दौरान छात्र आंदोलन में संपूर्ण क्रांति का नारा देने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 101वी जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी देश के कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें नमन किया। इसी कड़ी में बिहार की राजधानी पटना में जयप्रकाश नारायण की जयंती पर राजकीय समारोह का आयोजन किया गया। इस राजकीय समारोह मे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। जानकारी के अनुसार, प्रसिद्ध स्वतंतत्रा सेनानी, समाजवादी व संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 101वीं जयंती पर राजकीय समारोह में उनकी आदमकद प्रतिमा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को पटना के गांधी मैदान के पास माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि हम छात्र आंदोलन के समय से ही जयप्रकाश नारायण जी से जुड़े थे। इमरजेंसी के दौरान उन्हें की प्रेरणा से कई समाजवादी नेताओं ने इस आंदोलन में अपना सब कुछ दिया और हम लोग जेल भी गए थे। जेपी हमारे शुरू से आदर्श रहे और हमने उनको ही अपना आदर्श मानकर बिहार में इतना काम किया। जब हमें बिहार की जनता ने सरकार चलाने का मौका दिया तो हमने ऐतिहासिक गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण की भव्य मूर्ति का निर्माण कराया। हम तो आने वाली नई पीढ़ी को कहेंगे कि आप सभी जेपी के विचारों को ज्यादा से ज्यादा पढ़े और उनके विचारों को आत्मसात करने का प्रयास करें। जयप्रकाश नारायण भारत के महानतम समाजवादी नेताओं में से थे और उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। वही कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बिहार विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर, विधानसभा के उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री लेसी सिंह और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सहित कई नेता मौजूद थे।
बिहार के सारण में हुआ था जेपी का जन्म
जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताब दियारा गाँव में चित्रगुप्तवंशी कायस्थ परिवार में हुआ था। अक्टूबर 1920 में उनका विवाह बिहार बृज किशोर प्रसाद की बेटी प्रभावती से हुआ। वह डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रसिद्ध डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा द्वारा स्थापित बिहार विद्यापीठ में शामिल हो गए। 1929 में जब वे अमेरिका से लौटे तो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पूरे जोरों पर था। वह गांधी जी के साथ काम कर रहे जवाहर लाल नेहरू के संपर्क में आये। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। 1932 में गांधी, नेहरू और अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेस नेताओं के जेल जाने के बाद, उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष का नेतृत्व किया। जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। उन्हें 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इन्दिरा गांधी को पदच्युत करने के लिये उन्होने ‘सम्पूर्ण क्रांति’ नामक आन्दोलन चलाया। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से भी जाना जाता है। 1998 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मनित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’ भी उनके नाम पर है।


