मणिपुर की स्थिति बेहद भयावह, ललन सिंह बोले- दोनों समुदायों के बीच विश्वास पैदा करने की जरूरत
- 9 वर्षों के शासनकाल के बाद आज देश की जनता ख़ुद को छला हुआ महसूस कर रही है : ललन सिंह
- भारतीय जनता पार्टी को भ्रष्टाचार के विषय में बोलने का कोई अधिकार नहीं : ललन सिंह
पटना। बुधवार को लोकसभा में केंद्र सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में बोलते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि मणिपुर पूर्वोत्तर का महत्वपूर्ण राज्य है और जब वहां की हालात पर चर्चा होती है तो सत्ता पक्ष के लोग विभिन्न राज्यों में हुए छिटपुट घटनाओं का ज़िक्र कर उसको जस्टिफाई करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा की मणिपुर को इतने हल्के में लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज मणिपुर जल रहा है, कल मणिपुर की आग अन्य राज्यों तक भी फैल सकती है, इसकी गंभीरता को समझने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में मणिपुर की स्थिति बेहद भयावह है, भाजपा के लोग लंबे-लंबे भाषण दे रहे हैं, मगर मणिपुर के बारे में किसी ने गंभीरता से कुछ नहीं कहा क्योंकि उन्हें कुछ पता ही नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि हाल में ही मैं मणिपुर का दौरा करके लौट रहा हूं, दोनों समुदायों के लोगों से मिलने के बाद यह मालूम चला कि दोनों समुदायों में काफी दूरियां बन गई है, एक दूसरे के प्रति मन में घृणा का भाव है। दोनों समुदायों में विश्वास की इतनी ज्यादा कमी है कि उसको पाटना मुश्किल नजर आ रहा है। दोनों समुदायों का विश्वास राज्य की सरकार के प्रति समाप्त हो चुका है और दोनों समुदायों के लोग मौजूदा हालात के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बता रहे हैं। भाजपा के लोग कह रहे हैं कि देश के गृहमंत्री और रक्षा मंत्री मणिपुर की घटना पर बयान देने के लिए तैयार है। मगर यह देश की सरकार आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चल रही है। उन्होंने आगे कहा की 3 मई से आज तक लगातार मणिपुर में हिंसक घटनाएं हो रही है और अब तक 150 से अधिक लोगों ने मणिपुर की हिंसा में अपनी जानें गवाई है, मगर प्रधानमंत्री जी उनकी संवेदना ने एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं। विपक्ष की यही मांग थी की आदरणीय प्रधानमंत्री जी सदन में आए और मणिपुर की घटना पर देशवासियों को जानकारी दें। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। इतनी बड़ी घटना के बाद प्रधानमंत्री जी का यह दायित्व बनता था कि वह खुद इस मामले विस्तार से बयान दें।
दोनों समुदायों के बीच विश्वास पैदा करने की जरूरत
आज मणिपुर में दोनों समुदायों के बीच विश्वास पैदा करने की आवश्यकता है। 3 मई से लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, उनके पुनर्वास हेतु सरकार को गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। ललन ने कहा कि देश में बीते 9 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का शासन है और इस देश की जनता आज अपने आप को छला हुआ महसूस कर रही है। 2014 में प्रधानमंत्री जी ने देश के युवाओं से वादा किया था प्रतिवर्ष 2 करोड़ नौकरियां देंगे मगर 9 वर्ष पूरे होने को है 18 करोड़ नौकरियां का हिसाब देना तो दूर प्रधानमंत्री जी 18 लाख नौकरियां का भी हिसाब नहीं देते हैं। प्रधानमंत्री जी ने सिर्फ अपने चेहते पूंजीपतियों को रोजगार देने का काम किया है। वही प्रधानमंत्री जी ने काला धन वापस लाने का वादा किया था और यह भी कहा था कि सभी गरीब के खाते में 10 से 15 लाख रुपए भेजे जाएंगे परंतु काला धन वापस लाने की बात तो दूर सरकार के नाक के नीचे से विजय माल्या, मेहुल चौकसी और नीरव मोदी काला धन लेकर विदेश चले गए और देश के गृह मंत्री जी ने तो स्वंय इस बात को स्वीकार किया की 15 लाख देने का वादा सिर्फ़ चुनावी जुमला था। आगे उन्होंने भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह जदयू को किस कंपनी के माध्यम से फंडिंग देते थे उसकी भी जानकारी सार्वजनिक करें। 2015 विधानसभा चुनाव के दौरान जब राजद और जदयू का गठबंधन हुआ तब गृह मंत्री जी ने 3 महीने तक बिहार में कैंप किए था और देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी भी रिकॉर्ड 43 जनसभा को संबोधित किए थें। मगर भाजपा को केवल 52 सीट ही मिला, बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भाजपा वालों ने लालू प्रसाद यादव के छापेमारी शुरू कर दी और छापेमारी के कारण जब 2017 हमारा गठबंधन टूटा उसके बाद 2017 से 2022 के बीच में कुछ नहीं हुआ और जब 9 अगस्त 2022 को पुनः हमारा गठबंधन राजद से हुआ तबसे मोदी सरकार के पालतू तोते बार-बार भ्रमण कर रहे हैं। आगे उन्होंने कहा की गृह मंत्री जी ने पूर्णियां में कहा कि प्रधानमंत्री जी ने पूर्णिया हवाई अड्डा का निर्माण करवाया मगर हकीकत यह है कि अभी तक उसका काम भी शुरू नहीं हुआ है। लखीसराय में भी जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा था कि मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज, मुंगेर मेडिकल कॉलेज और हर घर नल का जल पहुंचने का काम मोदी जी ने किया मगर यह तीनों बात झूठ है। इन तीनों योजनाओं में केंद्र सरकार का एक रुपये का भी सहयोग नहीं लिया गया है। मोदी सरकार की फितरत है कि राज्य के योजनाओं में कुछ रुपयों का सहयोग देकर उसे अपना बना लेते हैं मगर नीतीश कुमार ने केंद्र के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। भाजपा के लोग बार-बार गठबंधन पर सवाल उठाते हैं मगर उन्हें यह भी जवाब देना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने PDP से गठबंधन क्यों किया था?


