February 11, 2026

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 73 नियम बदले, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए प्रावधान

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल के नियमों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने क्रिकेट के कुल 73 नियमों में संशोधन किया है, जो एक अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। वर्ष 2022 के बाद यह नियमों में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। नए प्रावधानों में टेस्ट मैच के दिन के आखिरी ओवर से लेकर डेड बॉल, ओवरथ्रो, हिट विकेट, गेंद और बल्ले के मानक तथा विकेटकीपर की स्थिति जैसे कई अहम पहलुओं को स्पष्ट और सख्त किया गया है। क्लब का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य खेल की निष्पक्षता बनाए रखना और रोमांच को और बढ़ाना है।
टेस्ट मैच में दिन के आखिरी ओवर का नया नियम
टेस्ट क्रिकेट में दिन के आखिरी ओवर को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। अब इस पर स्पष्ट नियम बना दिया गया है। नए प्रावधान के अनुसार, दिन का अंतिम ओवर हर हाल में पूरा कराया जाएगा, भले ही उस दौरान विकेट गिर जाए। अब यह नहीं होगा कि आखिरी ओवर में विकेट गिरते ही खेल रोक दिया जाए और नया बल्लेबाज अगले दिन आए। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि पहले के नियमों से खेल का रोमांच कम हो जाता था। यदि आखिरी ओवर में विकेट गिरता था, तो बल्लेबाजी करने वाली टीम को नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती थी। इससे न तो समय की बचत होती थी और न ही खेल में रोमांच बना रहता था, क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन पूरी करनी ही पड़ती थीं। नए नियम के तहत अब अंतिम ओवर पूरा किया जाएगा, ताकि गेंदबाजों को अनुकूल परिस्थितियों में नए बल्लेबाज को चुनौती देने का मौका मिल सके।
ओवरथ्रो और मिसफील्ड में साफ अंतर
नए नियमों में ओवरथ्रो और मिसफील्ड के बीच का फर्क भी स्पष्ट कर दिया गया है। अब ओवरथ्रो सिर्फ उसी स्थिति में माना जाएगा, जब कोई फील्डर विकेट पर गेंद फेंकता है और वह गेंद आगे निकल जाती है। इसके विपरीत, यदि कोई फील्डर बाउंड्री के पास गेंद रोकने की कोशिश करता है और गेंद उसके हाथ से फिसलकर निकल जाती है, तो उसे ओवरथ्रो नहीं बल्कि मिसफील्ड माना जाएगा। इस बदलाव से रन गिनने को लेकर होने वाले विवाद कम होने की उम्मीद है। पहले कई बार खिलाड़ी, अंपायर और दर्शक इस बात को लेकर भ्रम में रहते थे कि वह ओवरथ्रो है या साधारण फील्डिंग की गलती।
डेड बॉल की नई परिभाषा
डेड बॉल यानी मृत गेंद के नियम को भी अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। अब यह जरूरी नहीं होगा कि गेंद गेंदबाज या विकेटकीपर के हाथ में ही हो। यदि गेंद किसी भी फील्डर के पास पहुंच गई हो या मैदान पर रुक गई हो और अंपायर को यह लगे कि अब बल्लेबाज रन नहीं ले सकता, तो वह गेंद को डेड बॉल घोषित कर सकता है। इससे खेल में अनावश्यक रुकावटें और विवाद कम होंगे और अंपायर को निर्णय लेने में ज्यादा स्पष्टता मिलेगी।
हिट विकेट के नियम में स्पष्टता
हिट विकेट को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। नए नियमों में इसे पूरी तरह साफ कर दिया गया है। यदि बल्लेबाज शॉट खेलने के बाद संतुलन खो देता है और लड़खड़ाते हुए खुद ही स्टंप्स पर गिर जाता है, तो उसे हिट विकेट आउट माना जाएगा। इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि उस समय गेंद कितनी दूर जा चुकी है। हालांकि, अगर बल्लेबाज का किसी फील्डर से टकराव हो जाता है और उसी वजह से वह स्टंप्स पर गिरता है, तो उसे हिट विकेट आउट नहीं दिया जाएगा। इसी तरह, अगर बल्लेबाज के हाथ से बल्ला छूटकर सीधे स्टंप्स पर लग जाता है, तो वह आउट माना जाएगा। लेकिन यदि बल्ला पहले विकेटकीपर या किसी फील्डर को छूता है और फिर स्टंप्स से टकराता है, तो बल्लेबाज नॉट आउट रहेगा।
गेंद के लिए नए मानक
महिला और जूनियर क्रिकेट को ध्यान में रखते हुए गेंद के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं। मौजूदा और पूर्व महिला खिलाड़ियों से सलाह लेकर गेंदों को अब तीन आकारों में बांटा गया है। पहला आकार वही पारंपरिक गेंद है, जो अब तक पुरुष सीनियर क्रिकेट में इस्तेमाल होती रही है। इसके वजन और आकार में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दूसरा आकार महिला क्रिकेट और बड़ी उम्र के जूनियर खिलाड़ियों के लिए तय किया गया है, जो थोड़ा हल्का और छोटा होगा। तीसरा आकार छोटे उम्र के जूनियर खिलाड़ियों के लिए होगा, जो सबसे हल्का और छोटा रहेगा। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब का कहना है कि तीनों आकार की गेंदों की गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा से जुड़े नियम एक जैसे होंगे, ताकि किसी तरह की असमानता न रहे।
लेमिनेटेड बल्ले को सशर्त मंजूरी
बल्लों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए क्लब ने एक अहम फैसला लिया है। खुले स्तर के क्रिकेट में लेमिनेटेड बल्लों को सशर्त मंजूरी दे दी गई है। ये वे बल्ले होते हैं, जो लकड़ी के कई टुकड़ों को जोड़कर बनाए जाते हैं। हालांकि, शीर्ष स्तर के अंतरराष्ट्रीय और पेशेवर क्रिकेट में अभी भी पारंपरिक एक टुकड़े वाले बल्ले ही इस्तेमाल किए जाएंगे। क्लब का मानना है कि इससे निचले स्तर के खिलाड़ियों पर आर्थिक बोझ कम होगा और खेल ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगा।
खेल के रोमांच पर जोर
मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने साफ किया है कि इन सभी बदलावों का मकसद खेल को सरल, निष्पक्ष और रोमांचक बनाना है। नियमों की स्पष्टता से खिलाड़ियों, अंपायरों और दर्शकों सभी को फायदा मिलेगा। एक अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले ये प्रावधान आने वाले वर्षों में क्रिकेट के स्वरूप को और बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।

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