January 16, 2026

बिहार सरकार ने 22 आईएएस अधिकारियों का किया ट्रांसफर, अधिसूचना जारी

  • यूपीएससी टॉपर शुभम बने नालंदा के डीडीसी, दीपक कुमार मिश्रा बनाए गए मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव

पटना। बिहार सरकार ने नए साल की शुरुआत में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए 22 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने के इरादे से यह कदम उठा रही है। इस फेरबदल में जिलों से लेकर नगर निगम, अनुमंडल और मुख्यमंत्री सचिवालय तक व्यापक बदलाव किए गए हैं। इस तबादले को प्रशासनिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई युवा और तेजतर्रार अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। खास तौर पर मुख्यमंत्री सचिवालय की टीम को नए सिरे से मजबूत करने और जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व को ताजा ऊर्जा देने की कोशिश साफ नजर आती है।
मुख्यमंत्री सचिवालय की टीम को मिला नया रूप
इस तबादले का एक बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़ा हुआ है। नालंदा के नगर आयुक्त रहे दीपक कुमार मिश्रा को मुख्यमंत्री सचिवालय का संयुक्त सचिव बनाया गया है। वे 2019 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और नालंदा में उनके काम को काफी सराहा गया था। इसे उनके बेहतर प्रशासनिक प्रदर्शन का इनाम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की टीम में अब पांच आईएएस अधिकारी सीधे तौर पर कार्य कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि सचिवालय को मजबूत करने से नीतियों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय में तेजी आएगी।
यूपीएससी टॉपर शुभम कुमार को अहम जिम्मेदारी
इस तबादले में सबसे अधिक चर्चा शुभम कुमार की पोस्टिंग को लेकर है। 2020 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के टॉपर शुभम कुमार को नालंदा जिले का उप विकास आयुक्त बनाया गया है। शुभम कुमार बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने तीसरे प्रयास में देश में पहला स्थान हासिल किया था। आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले शुभम कुमार ने एंथ्रोपोलॉजी को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनकर यह सफलता पाई थी। नालंदा को मुख्यमंत्री का गृह जिला माना जाता है, ऐसे में यहां उनकी तैनाती को सरकार की एक सोच-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
नौ जिलों में नए डीडीसी की तैनाती
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य के नौ जिलों में नए उप विकास आयुक्तों की नियुक्ति की गई है। इन नियुक्तियों का मकसद विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत करना है। समस्तीपुर, सारण, पटना, नालंदा, गोपालगंज, बेतिया, भभुआ, खगड़िया और सहरसा जैसे जिलों में नए डीडीसी की तैनाती की गई है। इन जिलों में 2021 और 2022 बैच के युवा आईएएस अधिकारियों को मौका दिया गया है, जिससे जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है।
नगर निगमों में बदले गए आयुक्त
शहरी प्रशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सात नगर निगमों में नए आयुक्तों की नियुक्ति की गई है। बेतिया, बिहार शरीफ, गया, मुंगेर, मोतिहारी, भागलपुर और मुजफ्फरपुर नगर निगमों में नए आयुक्त तैनात किए गए हैं। इन बदलावों के पीछे सरकार की मंशा यह है कि शहरों में साफ-सफाई, बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा सके। नगर निगम आयुक्तों की भूमिका शहरी विकास में बेहद अहम मानी जाती है, इसलिए यहां किए गए तबादले को खास महत्व दिया जा रहा है।
अनुमंडलों में भी नई जिम्मेदारियां
पांच अनुमंडलों में नए अनुमंडल पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। बाढ़, दानापुर, पटना सदर, मुजफ्फरपुर पश्चिम और नवगछिया अनुमंडल में 2023 बैच के आईएएस अधिकारियों को एसडीओ बनाया गया है। सरकार का मानना है कि नए और युवा अधिकारियों के आने से अनुमंडल स्तर पर प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आएगी और आम लोगों की समस्याओं का समाधान बेहतर ढंग से हो सकेगा।
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का भी तबादला
आईएएस अधिकारियों के साथ-साथ बिहार प्रशासनिक सेवा के 11 अधिकारियों का भी तबादला किया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े कई अधिकारियों को जिलों और अनुमंडलों में नई जिम्मेदारी दी गई है। ओएसडी से लेकर एडीएम, एसडीओ और डीडीसी स्तर तक व्यापक बदलाव किए गए हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार केवल शीर्ष स्तर ही नहीं, बल्कि मध्य स्तर के प्रशासनिक ढांचे को भी दुरुस्त करने पर ध्यान दे रही है।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम
यह तबादला बिहार प्रशासन में एक बड़े पुनर्गठन के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार ने अनुभव और युवा ऊर्जा का संतुलन बनाने की कोशिश की है। जहां एक ओर अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं दूसरी ओर नए आईएएस अधिकारियों को जिलों और अनुमंडलों में सीधे काम करने का अवसर मिला है। इस फेरबदल से यह उम्मीद की जा रही है कि विकास योजनाओं की गति तेज होगी, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। आने वाले महीनों में इन बदलावों का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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