January 16, 2026

राजस्थान में मिड-डे मील में 2000 करोड़ का हुआ घोटाला, 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

जयपुर। राजस्थान में शिक्षा से जुड़ी एक अहम कल्याणकारी योजना मिड-डे मील एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। इस योजना में लगभग 2000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कॉनफैड और निजी फर्मों से जुड़े 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह घोटाला उस समय से जुड़ा है जब कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल बंद थे और सरकार ने बच्चों को वैकल्पिक रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था की थी।
कोविड काल में मिड-डे मील योजना का स्वरूप
कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्कूलों में नियमित पढ़ाई बंद थी, तब भी सरकार ने यह सुनिश्चित करने का दावा किया कि बच्चों को पोषण से वंचित न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से राज्य मिड-डे मील योजना के तहत स्कूली विद्यार्थियों को कॉम्बो पैक उपलब्ध कराए गए। इन पैकेटों में दाल, तेल, मसाले और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल थी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ये सामग्री एगमार्क मानकों और एफएसएसएआई के अनुरूप हैं और इन्हें सरकारी स्कूलों के माध्यम से वितरित किया गया। इस पूरे कार्य की जिम्मेदारी राज्य की सहकारी संस्था कॉनफैड को सौंपी गई थी, जिसने निजी फर्मों के जरिए आपूर्ति कराई।
अनियमितताओं की शुरुआत और संदेह
जांच एजेंसियों के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन के दौरान ही कई स्तरों पर अनियमितताओं के संकेत मिलने लगे थे। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखा और कई योग्य व पात्र फर्मों को तकनीकी कारणों का हवाला देकर बाहर कर दिया गया। इसके विपरीत, कुछ चुनिंदा निजी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाते हुए टेंडर आवंटित किए गए। आरोप है कि यह सब अधिकारियों और कॉनफैड के जिम्मेदार पदाधिकारियों की आपसी मिलीभगत से किया गया। नियमों में मनमाने ढंग से बदलाव कर योजना को भ्रष्टाचार का जरिया बना दिया गया।
फर्जी आपूर्ति और बिलों का खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन फर्मों को टेंडर दिए गए, उन्होंने आगे अन्य संस्थाओं को अनैतिक तरीके से सबलेट कर दिया। इसके जरिए ट्रांसपोर्टरों और फर्जी आपूर्तिकर्ताओं का एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया गया। कई मामलों में यह पाया गया कि वास्तविक रूप से न तो सामग्री की खरीद की गई और न ही उसकी आपूर्ति हुई। इसके बावजूद अधिक दरों के फर्जी बिल तैयार किए गए और उन्हीं के आधार पर सरकारी भुगतान हासिल कर लिया गया। इस प्रक्रिया में सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
सरकारी खजाने को भारी नुकसान
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले से राज्य सरकार को लगभग 2000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है। यह राशि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन बच्चों के अधिकारों से जुड़ी है, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी। जिस धन का उपयोग बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर होना था, वही धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि सरकार की नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर भी सवाल उठने लगे हैं।
एसीबी की कार्रवाई और केस दर्ज
घोटाले के उजागर होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सख्त कदम उठाते हुए 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें कॉनफैड से जुड़े अधिकारी और निजी फर्मों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
एसीबी का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जिसमें नियमों को जानबूझकर तोड़ा गया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। आगे की जांच में और भी नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
इस घोटाले ने प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। इतने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं लंबे समय तक कैसे चलती रहीं, यह एक बड़ा प्रश्न है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऑडिट और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था होती, तो इस तरह के घोटाले को रोका जा सकता था। यह मामला भविष्य में ऐसी योजनाओं के लिए सख्त निगरानी तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
आगे की जांच और संभावित प्रभाव
फिलहाल एसीबी द्वारा जांच जारी है और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घोटाले का असर न केवल संबंधित अधिकारियों और फर्मों पर पड़ेगा, बल्कि यह राज्य सरकार की छवि और मिड-डे मील जैसी कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव डालेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या इससे व्यवस्था में सुधार के ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

You may have missed