February 21, 2026

डोनाल्ड ट्रंप ने फिर विदेशी सामानों पर लगाया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ, 150 दिनों तक रहेगा लागू

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। शुक्रवार को उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर सभी विदेशी सामानों पर 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया। यह टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और मौजूदा कानून के तहत अधिकतम 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन ने अपने व्यापारिक एजेंडे को सुरक्षित रखने की दिशा में अहम कदम बताया है।
ओवल ऑफिस से किया ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने लिखा कि ओवल ऑफिस से सभी देशों पर 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू करने के आदेश पर हस्ताक्षर करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, अभी तक इस कार्यकारी आदेश का विस्तृत आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कदम
ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उसी दिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पिछली टैरिफ नीतियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह कहा कि पिछले साल लगाए गए कई टैरिफ गैर-कानूनी थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने जिन कानूनों का सहारा लेकर जवाबी शुल्क लगाए थे, उनका इस्तेमाल संविधान और कानून की सीमाओं से बाहर जाकर किया गया।
पुराने कानून के सहारे नया रास्ता
नए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ को लागू करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का इस्तेमाल किया है। यह धारा राष्ट्रपति को सीमित अवधि के लिए एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार देती है। इस प्रावधान के तहत लगाया गया शुल्क केवल 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है। यदि इसे आगे भी जारी रखना है, तो इसके लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी जरूरी होगी। जानकारों के मुताबिक यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन ने इसे अस्थायी लेकिन व्यापक कदम के तौर पर पेश किया है।
पिछले टैरिफ क्यों रद्द हुए
पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत कई देशों पर 10 से 50 प्रतिशत तक जवाबी टैरिफ लगाए थे। इनमें कनाडा, मैक्सिको और चीन के सामान भी शामिल थे, जिन पर फेंटेनाइल तस्करी रोकने के नाम पर शुल्क लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी टैरिफ को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से भारत और ब्राजील जैसे देशों पर लगाए गए अलग-अलग शुल्कों के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
आगे भी जारी रहेगा शुल्क का दबाव
10 प्रतिशत के इस नए फ्लैट रेट के साथ-साथ ट्रंप प्रशासन की योजना अन्य व्यापारिक कानूनों को भी सक्रिय रूप से इस्तेमाल करने की है। संकेत दिए गए हैं कि धारा 301 और धारा 232 के तहत पहले से मौजूद आयात शुल्क को बरकरार रखा जाएगा। इसके अलावा नई व्यापारिक जांच भी शुरू की जा सकती है। धारा 301 के तहत किसी देश पर तभी शुल्क लगाया जा सकता है, जब जांच में यह साबित हो जाए कि उसने व्यापार समझौते का उल्लंघन किया है।
विदेशी कारों पर अलग शुल्क की तैयारी
डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी कारों पर भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में अमेरिका के घरेलू उद्योग को बचाने के लिए 15 से 30 प्रतिशत तक का अलग टैरिफ लगाया जा सकता है। इससे यूरोप, जापान और कोरिया जैसे देशों की कार कंपनियों पर सीधा असर पड़ सकता है।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अनुमान के अनुसार, इस 10 प्रतिशत ग्लोबल ड्यूटी से अमेरिका की औसत प्रभावी टैरिफ दर 13.6 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, यदि कुछ मौजूदा छूटें बनी रहती हैं, तो यह दर घटकर 11.4 प्रतिशत तक भी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आयात महंगा होगा और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ सकता है।
रिफंड को लेकर अनिश्चितता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन आयातकों से पहले ही टैरिफ वसूला जा चुका है, उन्हें रिफंड मिलेगा या नहीं। यह फैसला निचली अदालतों पर छोड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि करीब 1,500 कंपनियों ने इस मुद्दे पर पहले ही मुकदमे दायर कर रखे हैं। अगर रिफंड देना पड़ा, तो इसकी रकम करीब 170 अरब डॉलर तक हो सकती है।
ट्रंप की नाराजगी
रिफंड के मुद्दे पर स्पष्टता न होने से ट्रंप ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति साफ नहीं हुई, तो आने वाले पांच साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की कानूनी अनिश्चितता से नीतिगत फैसले कमजोर होते हैं।
वित्त मंत्री का दावा
इन तमाम आशंकाओं के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने डलास के इकोनॉमिक क्लब में दावा किया कि धारा 122, 232 और 301 के संयुक्त उपयोग से वर्ष 2026 में अमेरिका का कुल टैरिफ राजस्व लगभग अपरिवर्तित रहेगा। उनके मुताबिक सरकार को भारी नुकसान की आशंका नहीं है और राजस्व संतुलन बना रहेगा।
वैश्विक व्यापार पर नजर
ट्रंप के इस नए फैसले से वैश्विक बाजारों और व्यापारिक साझेदारों की नजरें अमेरिका पर टिकी हैं। कई देशों ने अभी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। कुल मिलाकर, 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति टकराव और दबाव की रणनीति पर ही आगे बढ़ रही है।

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