सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ वकीलों के साथ बैठक में पूरे देश में आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प
फुलवारीशरीफ। इमारत ए शरिया के अमीर ए शरियत सह आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मो. वली रहमनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने विशेष एजेंडे के तहत सदन से देश के कमजोर, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए कानून पारित किया है। इस कानून से देश के कमजोर वर्गों को दर बदर होने के लिए मजबूर कर सकता है। रविवार को इमारत ए शरिया के अलमहद भवन में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ बैठक में आये वकीलों को संबोधित करते हुये कहा कि उक्त तीन कानूनों ने देश के भीतर चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। कानून निर्माता की जिम्मेदारी है कि भविष्य के जोखिमों और चिंताओं का सामना करने के लिए आपको इस समय अपने कानूनी कौशल का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एम आर शमशाद ने नागरिकता संशोधन कानून के बारे में लोगों को विसतार से बताया और कहा कि यह तीनों कानून मुल्क और संविधान के खिलाफ है। केंद्र सरकार इसे एक पॉलिटिकल मुद्दा बनान चाहती है। इसलिए इस मसले को कानून के साथ पॉलिटिकल तौर पर भी हल करना होगा। गुवाहाटी हाईकोर्ट के वकील अब्दुस शकूर तपेदार ने असम में हुए एनआरसी के बारे और उसके कागजात के बारे में भी बताया कि हमें हालात से ना तो डरना है और ना ही मायूस होना है, उन्होंने वहां के पीड़ित लोगों के बारे में कानूनी पैरवी और कुछ फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वहां सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम आरंभ हुआ था और पूरे देश में किस प्रकार से यह काम होगा, किसी को कुछ पता नहीं। इमारत ए शरिया के कार्यवाहक महासचिव नौलना मोहम्मद शिबली कासमी ने भी अपने विचार रखें। इस मौके पर बिहार, ओडिशा, झारखंड और बंगाल के अधिवक्ता मौजूद थे।


