बिहार में कभी भी ‘लॉक डाउन’, जानिए क्या होता है लॉक डाउन
पटना (संतोष कुमार)। कोरोना वायरस के बिहार में दो पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। जिसमें एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति की शनिवार की शाम पटना एम्स में मौत हो गई है। लेकिन कोरोना जांच की रिपोर्ट रविवार को आने के बाद पटना एम्स ने कोरोना से मौत की पुष्टि की है। जबकि एक संक्रमित व्यक्ति का एनएमसीएच में इलाज चल रहा है। कोरोना से हुई एक व्यक्ति की मौत से पूरे बिहार में हड़कंप मच गया है। वहीं नीतीश सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आनन-फानन में हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। जहां बिहार में लॉकडाउन घोषित करने पर विचार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि शाम तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर फैसला ले सकते हैं।
क्या होता है लॉक डाउन
‘लॉक डाउन’ का सीधा सा मतलब होता है तालाबंदी। जिस तरह किसी संस्थान या फैक्ट्री को बंद किया जाता है तो वहां तालाबंदी हो जाती है। उसी तरह शहर लॉक डाउन का अर्थ है कि आप अनावश्यक कार्य के लिए सड़कों पर ना निकलें। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने का अभी तक कोई पुख्ता इलाज सामने नहीं आया है। इससे बचने का एक ही रास्ता है कि आप खुद को संक्रमित व्यक्ति से बचाव करें। देश में जिस तरह से लगातार संक्रमित व्यक्तियों की तादाद बढ़ रही है उसे देखते हुए आप अन्य लोगों के संपर्क में नहीं आएं।
दरअसल, लॉकडाउन एक एमरजेंसी व्यवस्था है जो किसी आपदा के वक्त शहर में सरकारी तौर पर लागू होती है। लॉक डाउन की स्थिति में उस क्षेत्र के लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती है। उन्हें सिर्फ दवा या अनाज जैसी जरूरी चीजों के लिए बाहर आने की इजाजत मिलती है। लेनदेन के लिए आप बैंक से पैसा निकालने के लिए भी जा सकते हैं।
क्यों लागू होता है लॉक डाउन
किसी सोसायटी या शहर में रहने वाले वहां के स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य या अन्य जोखिम से बचाव के लिए इसे लागू किया जाता है। इन दिनों कोरोना संक्रमण के मद्देनजर कई देशों में इसे अपनाया जा रहा है।

ये बातें भी ध्यान रखें
1. किसी भी व्यक्ति को अपने घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं होगी।
2. जिले के समस्त शासकीय, अर्धशासकीय कार्यालय, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान बंद रहेंगे।
3. मेडिकल दुकान और हॉस्पिटल को छोड़कर शेष समस्त व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहते हैं। केवल वही संस्थान ओपन रहते हैं जो जीवन के लिए आवश्यक हैं।

