बिहार की राजनीति में ‘अपशब्दों’ की एंट्री, पीके को बोल दिया बहुत कुछ

पटना। जदयू से अलग होने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर उठाये गए सवाल और उनके द्वारा प्रदेश के युवाओं को साधने की कोशिश को महिला विकास मंच और आल इंडिया स्टूडेंट यूनियन ने भ्रमजाल बताया, साथ ही पीके को अपशब्दों से अलंकृत भी किया। हालांकि जहां जदयू प्रशांत किशोर को लेकर चुप्पी साध रखी है, वहीं अन्य संगठन प्रशांत किशोर पर हमला करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि बिहार की राजनीति किस स्तर पर जाने वाली है। कुछ माह बाद ही बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में संगठनों द्वारा किसी व्यक्ति पर अपशब्दों का इस्तेमाल करना कहां तक सही है। अगर ऐसे बयानों को नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार की राजनीति में अपशब्दों की चर्चा विश्व कीर्तिमान स्थापित करेगा।

पटना के होटल कासा पिकोला में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष वीणा मानवी और आल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम आनंद ने संयुक्त रूप से कहा कि बिहार बेहाल है। युवा परेशान हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर बिहार के युवाओं पर पूंजीवाद और मैनेजमेंट का भ्रमजाल फैला रहे हैं। यह बिहार के युवाओं का अपमान है और इससे बिहार के युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है। मानवी ने कहा कि प्रशांत कहते हैं कि उन्हें राजनीति नहीं करनी। लेकिन उनकी मंशा सीएम बनने की है और अब वे चाहते हैं कि अपने मार्केटिंग स्किल से डाटा कलेक्शन कर चुनाव जीतें और युवाओं को गुमराह कर सीएम बनें। उनका यह सोचना गलत है, क्योंकि राजनीति सामाजिक और सेवा के कार्यों से जुडी चीज है, जिसमें कारपोरेट का दखल सही नहीं है। उन्होंने युवाओं को लेकर जितनी भी बातें कहीं और बात बिहार की लांच किया है, उससे बिहार की राजनीति प्रभावित नहीं होने वाली है। मानवी ने कहा कि नीतीश कुमार की थाली में खाना खाने के बाद उसी की थाली में थूकने वाले से क्या उम्मीद की जा सकती है? अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए इन्होंने राजनीति की दुकान खोल दी है।
वहीं यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम आनंद ने कहा कि युवा के सपने को बेच कर राजनीति का बाजारीकरण नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि बिहार की समाजवादी और संघर्षवादी राजनीति का गला घोंटना प्रशांत किशोर का पहला उद्देश्य है, जिसके लिए उसने अपना नया शिकार बिहार की जनता को चुना है। अगर भाजपा गोडसे की जायज औलाद है तो अवसरवादी राजनीति करने वाला प्रशांत किशोर भी गोडसे की ही दूसरी नाजायज औलाद है। संवाददाता सम्मेलन में अरूणिमा, फाहिमा, आलोक आनंद, प्रिया राज, अखिलेश यादव, कुंदन राणा, जयदीप कुमार, लालु यादव, मोनू रंजन भी उपस्थित रहे।

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