पुलवामा हमले के शहीदों को किया गया याद, हारून नगर से निकला कैंडिल मार्च, दी श्रद्धांजलि
फुलवारी शरीफ। सकरैचा पंचायत के सभी स्कूल में जनप्रतिनिधि, शिक्षक, बच्चों द्वारा पुलवामा हमले के शहीदों को याद किया गया। उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं के द्वारा भारत माता की जय, जय हिंद के नारे लगाए गए। इस मौके पर सकरैचा पंचायत मुखिया सह जदयू सेवा दल के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मगध प्रमंडल के प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने कहा की पुलवामा हमले के शहीद जवानों ने अपने शहादत से वतन की मिट्टी को गौरवान्वित करने का काम किया है। आज जो हम अपने घरों में सुकून की जिंदगी जी रहे हैं, वो भारतीय सैनिकों की वहज से है। देश की सेवा व राष्ट्र सुरक्षा के प्रति समर्पित भारतीय सेना के जवान राष्ट्र भक्ति का अप्रतिम उदाहरण हैं। मातृभूमि रक्षार्थ आपका बलिदान महानतम है। मौके पर शहीद जवानों की याद में दो मिनट का मौन रखकर ऐसे वीर जवानों की शहादत को नमन किया गया।


उधर पुलवामा हमले एक एक साल होने के अवसर पर हारून नगर में चल रहे एनआरसी, एनपीआर व सीएए विरोधी धरना में शामिल धरनार्थियों व आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में देर शाम धरना स्थल पर एकत्र हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने शहीदों के सम्मान में शहीद जवान अमर रहे के नारे लगाते रहे। कैंडिल मार्च मुख्य सड़क से होकर खोजा इमली मोड़, साकेत विहार मोड़, पुलिस कॉलोनी मोड़ तक गया और फिर वापस हारून नगर पहुंचकर समाप्त हो गया। वहीं दूसरी तरफ नोहसा में चल रहे एनसीआर, सीएए व एनपीआर विरोधी धरना स्थल से भी पुलवामा हमले के शहीद जवानों के सम्मान में कैंडिल मार्च निकला गया। राजद कार्यकर्ता आफताब ने बताया कि कैंडिल मार्च धरना स्थल से मुख्य सड़क नोहसा मोड़ तक गया और फिर वापस नोहसा पेट्रोल लाइन के पास आकर समाप्त हो गया। कैंडिल मार्च में सैंकड़ों की संख्या में मुस्लिम पर्दानशीं महिलायें व बच्चे, बुजुर्ग, युवा सहित हर वर्ग के लोगों की भागीदारी रही।

वहीं नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सय्यद तसनीम रिजवी ने कहा की हमारे देश के वीर सैनिक चौबीस घंटे देश की सीमा पर नजर बनाए हुए हैं, चाहे कैसा भी मौसम क्यों न हो? यह देश और देश का जर्रा-जर्रा अपने शहीद सपूतों का ऋणी है। नसूर अजमल नौशी ने कहा कि 14 फरवरी को पश्चिमी सभ्यता की वैलेंटाइम डे के जगह अपने देश की रक्षा करने वाले वीर जवानों की याद में शहीद दिवस मनायें, जिनके चलते हम सभी चैन की नींद सोते हैं। उन्होने शहीदों के सम्मान में एक शेर भी पढ़ा
’तुम्हारे शौर्य के गीत, कर्कश शोर में खोये नहीं।
गर्व इतना था कि हम देर तक रोये नहीं’।

