February 18, 2026

परिचर्चा : जल और हरियाली पर संकट आया, तो धरती से जीवन हो जाएगा लुप्त

पटना। जल और हरियाली पर यदि संकट आया, तो वह दिन दूर नहीं जब धरती से जीवन लुप्त हो जाएगा। विकास के रास्ते पर चलते हुए मानव सभ्यता उस मोड़ पर आ पहुंची है, जहां से विनाश का रास्ता शुरू होता है। ऐसे में आवश्यक यह है कि ऊर्जा के नए स्त्रोतों की खोज की जाए और उनके प्रयोगों को बढ़ावा दिया जाए। ये बातें टीपीएस कॉलेज में आयोजित जल जीवन हरियाली दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए बिहार राज्य विश्वविद्यालय आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) उपेंद्र नाथ वर्मा ने कहीं। मंगलवार को टीपीएस कॉलेज में जल जीवन हरियाली दिवस पर वैकल्पिक ऊर्जा: सौर ऊर्जा पर परिचर्चा में बड़ी संख्या में महाविद्यालय के शिक्षक और छात्र उपस्थित थे। परिचर्चा आरंभ करते हुए स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र के प्रो. श्यामल किशोर ने विस्तार से बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे उक्त अभियान की उन ग्यारह बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला, जो इस अभियान की बुनियाद हैं।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रधानाचार्य प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंह ने घोषणा की कि महाविद्यालय परिसर में प्रत्येक महीने के प्रथम मंगलवार को जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत विभिन्न विषय पर व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। प्रो. सिंह ने बिहार सरकार की इस पहलकदमी की सराहना करते हुए कहा कि मानव सभ्यता के भविष्य की रक्षा के लिए हमें सभी को सजग होना होगा और यह हमारा दायित्व है कि हम समाज में जागरूकता पैदा करने में अपनी भूमिका निभाएं। कार्यक्रम का संचालन प्रो. श्यामल किशोर एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. छोटेलाल खत्री ने किया। इस मौके पर डॉ. अंजलि प्रसाद, डॉ. कृष्णनंदन प्रसाद, डॉ. शशि भूषण चौधरी, डॉ. विजय कुमार सिन्हा, डॉ. उदय कुमार, डॉ. विनय भूषण, डॉ. नूतन, डॉ. जावेद अख्तर खां, डॉ. अबू बकर रिजवी आदि मौजूद थे।

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