खतरे में पड़ी पटना की मेयर की कुर्सी, 75 में 41 पार्षदों ने किए सिग्नेचर
पटना। राजधानी पटना में कोरोना संक्रमण के प्रसार के बीच पटना नगर निगम में शह-मात का खेल अंतिम चरण में पहुंच गया है। पटना की मेयर सीता साहू की कुर्सी खतरे में आ गई है। फिर से मेयर के विरोधियों ने उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया है, जिस पर 75 में से 41 पार्षदों द्वारा अपने हस्ताक्षर किए जाने की खबर है। वहीं मेयर ने कहा है कि पार्षद मेरे साथ हैं तो विपक्षी खेमा के पूर्व उप महापौर का कहना है कि मेयर इस बार अपनी कुर्सी नहीं बचा पाएंगी।
विरोधियों का महापौर पर आरोप
विरोधियों ने महापौर पर आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी में पार्षदों एवं पटनावासियों के लिए उन्होंने कोई कार्य नहीं किया है, जिससे पार्षदों का अब उन पर विश्वास नहीं रह गया है। मेयर पर आरोप है कि उन्होंने आउटसोर्स को बढ़ावा देने के लिए वार्ड समिति का गठन नहीं होने दिया और जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने निगम में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को भी बढ़ावा दिया है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से निगम कोष की लूट कराई गई और पिछले तीन साल में उन्होंने कोई कार्य नहीं किया।
मेयर बोलीं- मेरे साथ हैं पार्षद
इधर, मेयर सीता साहू ने अविश्वास प्रस्ताव पर कहा कि पार्षद मेरे पास हैं। सिर्फ हस्ताक्षर कराकर लाने से नहीं होगा। मैं हर हाल में बहुमत साबित कर दूंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी विकास कार्य नहीं करने दे रहे हैं। तीन साल के कार्यकाल में जो कार्य मैंने किया, ऐसा कार्य नगर निगम के किसी महापौर ने नहीं किया है। इस तरह से बार-बार अविश्वास प्रस्ताव लाने से विकास कार्य बाधित होता है। सबको साथ मिलकर पटना को सुंदर और स्वच्छ बनाने में सहयोग देना चाहिए। मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। मेरे पुत्र पर लगाए गए आरोप भी निराधार हैं।
कुर्सी नहीं बचा पाएंगी सीता साहू- पूर्व उप महापौर
पूर्व उप महापौर विनय कुमार पप्पू ने कहा कि इस बार सीता साहू की कुर्सी जानी तय है। 41 सदस्यों ने हस्ताक्षर करके दिया है। बड़ी संख्या में पार्षद उनके विरोध में हैं। सात दिनों के अंदर अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाकर बहुमत साबित करने की तिथि घोषित करनी है।


