PATNA : खंडहर के रुप में तब्दील हो रहे कबीर मठ क्या पर्यटन स्थल के रुप में होगा विकसित ?
जिला प्रशासन ने वर्ष-13 में करोड़ों रुपया का भेजा था पर्यटन विभाग को प्रस्ताव

फतुहा (भूषण प्रसाद)। सैकड़ों वर्ष पूर्व संत कबीर के आदर्शो को प्रचारित व प्रसारित करने के उद्देश्य से कबीरपंथियों के द्वारा पटना के फतुहा में स्थापित आचार्य कबीर मठ बदहाली का शिकार है। कभी साधु-संतों से गुलजार रहने वाले इस कबीर मठ में साधुओं का संगत व पंगत होता था और इस कबीर मठ से कई कल्याणकारी कार्य भी सम्पादित होते थे। कहा तो यहां तक जाता है कि सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक पेशावर से कलकत्ता जाने के क्रम में गंगा किनारे अवस्थित इस मठ में रुके थे तथा कबीर पंथियों के साथ संगत भी किया था। गुरुनानक ने इसी कबीर मठ में साधु-संतों के लिए एक कुंए भी खोदवाए थे। आज भी सिख धर्म के अनुयायी इस मठ में कुंए के मुंडेर पर आकर मत्था टेकते हैं तथा प्रसाद के रुप में कुएं के पानी को पीते हैं। लेकिन पिछले दो-तीन दशकों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व महंती के विवाद ने इसकी महत्ता की चमक को धुंधला कर दिया है।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व महंती विवाद का बना पर्याय
अब फतुहा का यह कबीर मठ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व महंती विवाद का पर्याय बन चुका है। नतीजा यह है कि कबीर मठ परिसर में बने भवन जर्जर हो चुके हैं। छतों के सिलिंग ढह रहे हैं। छत की छड़ दिखाई दे रही है। कमरे में दरार पड़ चुके हैं। अंदर का बागवानी भी लगभग खत्म हो चुके हैं। कबीर मठ के बदहाली को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कबीरायतन आंख अस्पताल भी खोला गया तथा तत्कालीन बिहार सरकार के मंत्री सुशील कुमार मोदी, अश्विनी चौबे जैसे नेता कबीर मठ का दौरा भी कर चुके हैं।
पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की थी योजना
इतना ही नहीं, वर्ष-2013 में जिला प्रशासन ने स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल के प्राक्कलन प्रतिवेदन पर तीन करोड़ 84 लाख रुपए की लागत से इसे पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव के पास स्वीकृति के लिए अनुमोदन भी भेजा था लेकिन यह भी ढ़ाक का तीन पात साबित हुआ। न आज तक इस योजना की राशि आवंटित हुई और न ही इसे पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए कोई योजना बनाई गई। हाल ही में कबीर मठ का महंत मनोनीत हुए ब्रजेश मुनि ने बताया कि अब कबीर मठ अपना पुराना गौरव जरुर प्राप्त करेगा। इसे पर्यटन स्थल के रुप में अवश्य विकसित किया जाएगा तथा संस्कृत जैसे विषय पर शोध केंद्र भी बनाए जाने की प्रारुप पर काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मठ के पौराणिक व एतिहासिक गौरव प्राप्त करने के लिए कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।

