PATNA : कोविड-19 को लेकर जारी गाइडलाइन कागजों तक सिमटी, नामांकन में उमड़ी भीड़
पटना। कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव होने से संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। कोविड-19 को लेकर जारी गाइडलाइन महज कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। संक्रमण के खतरे से बेफिक्र चुनावी भीड़ महामारी के मुहाने पर ले जा सकती है। आयोग की गाइडलाइन गुरुवार को पटना प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के सामने नामांकन के पहले दिन टूटती दिखी। ऐसे में नामांकन के पहले दिन की भीड़ ने यह संकेत दे दिया है कि अगर आयोग गंभीर नहीं हुआ तो चुनाव के बाद बिहार को कोरोना विस्फोट से बचाना बड़ी चुनौती होगी।


नामांकन की व्यवस्था पटना प्रमंडलीय कार्यालय में की गई है। गुरुवार को नामांकन का पहला दिन था। कार्यालय के बाहर भारी हुजूम था। गाड़ियों की कतार से सड़क जाम थी। नारेबाजी का शोर आयुक्त कार्यालय के अंदर तक पहुंच रहा था। प्रमंडलीय कार्यालय के सामने मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया था, लेकिन बाहर भीड़ को नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। वहीं प्रत्याशी भी कोविड-19 से बेफ्रिक नजर आए और उन्हें जिम्मेदारों ने भी कोई सख्ती न ही दिखाई। चुनाव आयोग द्वारा पर्यवेक्षक से लेकर अन्य पदाधिकारियों को लगाया गया था, लेकिन भीड़ को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने वाला कोई जिम्मेदान नजर नहीं आ रहा था। हालांकि गेट के अंदर तो दो से तीन लोग ही प्रत्याशी के साथ जा रहे थे, लेकिन थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन की सिर्फ औपचारिकता ही की जा रही थी।
बहरहाल, ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि नामांकन के दौरान ही जब कोरोना से बचाव को लेकर निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन टूटती नजर आयी तो चुनाव प्रचार, मतदान और मतगणना तक क्या होगा। चुनाव बाद अगर कोरोना विस्फोट हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा?

