February 15, 2026

कोरोना को लेकर प्रशासन भी लापरवाह, दुर्गा पूजा पर रोक लगाए जाने से फूटा लोगों का गुस्सा

पटना/सीतामढ़ी । कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर अब प्रशासन भी लापरवाह नजर आ रही है। कुछ समय पहले तक जहां प्रशासनिक अधिकारी कोरोना से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए सरकारी बसों पर स्लोगन, बैनरों-पोस्टरों के माध्यम से आम लोगों को जानकारी देने में जुटे नजर आ रहे थे। वहीं चुनावी माहौल में पटना में चलने वाले सिटी बसों से कोरोना से बचाव के लिए लिखे स्लोगन को अब बदल दिया गया है। उक्त बसों पर अब मताधिकार का संदेश प्रचारित किया गया है। इससे यहीं पता चलता है कि प्रशासन कोरोना को लेकर अब पहले की तरह सजग नहीं है, बल्कि लोगों की जान बचाने से ज्यादा उनके लिए मताधिकार का प्रतिशत बढ़ाना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब प्रशासन ही कोरोना की रोकथाम से ज्यादा वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए लोगों को घरों से निकलकर वोट डालने के लिए प्रेरित कर रही है तो दुर्गा पूजा मनाने पर रोक क्यों। बता दें कोरोना संक्रमण को लेकर जारी गाइडलाइन के अनुसार बिहार में बड़े पंडाल बनाने पर रोक लगा दी गई है। इसे लेकर राज्य के विभिन्न जिलों से लोगों की सड़कों पर फूट रही नाराजगी की तस्वीर सामने आने लगी है।
सीतामढ़ी जिला में दुर्गा पूजा पर रोक लगाए जाने के सरकारी फरमान को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सरकार के इस फैसले के खिलाफ लोगों ने सड़कों पर उतर कर उग्र प्रदर्शन किया। सीतामढ़ी के सुरसंड में सभी वर्ग के लोगों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद कर सरकार के इस आदेश का विरोध किया। इतना ही नहीं, लोगों का आक्रोश इतना था कि उनके द्वारा सुरसंड में जगह-जगह चौक-चौराहे पर अगजनी कर आवागमन को भी पूर्णत: बाधित कर दिया गया। दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर “पूजा का प्रचार है, वोट का बहिष्कार है, रैली आपकी तय है, पूजा से क्यों भय है?” संबंधित पोस्टर लगाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करते दिखे। लोगों ने जगह-जगह सड़क पर आगजनी कर सड़क जाम कर दिया। लोगों का कहना था कि जब नेताओं की सभा, रैली, चुनाव प्रचार, शादी समेत किसी समारोह पर कोई रोक नहीं है। जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों की भीड़ रहती है और न ही इस दौरान किसी तरह के सोशल डिस्टेंसिग का पालन किया जाता है। ऐसी जगहों पर अधिकतर लोग तो बिना मास्क के ही नजर आते है, लेकिन सिर्फ मां दुर्गा के पूजा पर रोक लगा दी गई है, जो कि कही से न्यायसंगत नहीं है।

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