February 15, 2026

कांग्रेस का NDA सरकार पर हमला, बिहार की स्वास्थ्य सेवा वेंटिलेटर पर

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद अब दूसरे चरण का मतदान आगामी 3 अक्टूबर को होना है। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वार-पलटवार का दौर लगातार जारी है। इस दौरान शुक्रवार को कांग्रेस ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार को घेरा। राजधानी पटना के एक होटल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बिहार की एनडीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सत्ता का सुख भोगते रहे और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को आईसीयू में पहुंचा दिया, जो अब वेंटिलेटर पर आखिरी सांसे गिन रही है। उन्होंने हाल ही में वर्ल्ड बैंक और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई भारत की हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में प्रत्येक राज्य की रैंक निर्धारित की गई है, जिसमें स्वास्थ्य के तमाम पायदान में बिहार और उत्तर प्रदेश देश में आखिरी पायदान पर है। साल 2015-18 के बीच स्वास्थ्य के सूचकांक और सेवाओं में वृद्धि तो दूर की बात, बिहार के हालात और बदतर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार की अध्यक्षता वाले नीति आयोग के प्रमुख अमिताभ दास को यह कहना पड़ा कि बिहार जैसे राज्यों के स्वास्थ्य सेवाओं में खराब प्रदर्शन से समूचा भारत ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में पिछड़ गया है। सुरजेवाला ने कहा कि महागठबंधन बिहार की जनता से एक नया मौका मांग रहा है और महागठबंधन की सरकार आने के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करना हमलोगों की जिम्मेवारी है।
इसके पहले कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर मदन मोहन झा के नेतृत्व में बिहार के राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात की। उक्त प्रतिनिधिमंडल में रणदीप सुरजेवाला भी शामिल थे। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल मुंगेर गोली कांड को लेकर राज्यपाल से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की है और पुलिस की गोली से मरने वाला युवक अनुराग के परिजनों को 50 लाख देने की मांग रखी है, साथ ही मुंगेर गोली कांड के दोषी अधिकारियों को सस्पेंड कर उन पर प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की है। इस पर राज्यपाल फागू चौहान ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि कानून और संविधान को ध्यान में रखकर जो भी उचित कार्रवाई होगी, करने की पूरी कोशिश करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा, विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा, प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश राठौड़, रोहन गुप्ता, जया मिश्रा समेत अन्य नेता मौजूद थे।
बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल
1. बिहार में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 60% डॉक्टर और 71% नर्स नहीं हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 12,200 स्वीकृत पद हैं पर केवल 5,205 डॉक्टर पदस्थापित हैं। जबकि स्वास्थ्य केंद्रों में 19,155 नर्सों के पद मंजूर हैं लेकिन यहां केवल 5,634 नर्स ही काम कर रही हैं। यह बात नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के अपने शपथपत्र में बताई है।
2. भारत सरकार ने लोकसभा में बताया कि बिहार में 2011 की जनगणना के आधार पर 18,637 हेल्थ सब सेंटर की जरूरत है, जबकि मात्र 50% ही उपलब्ध है।
3. संसद को यह भी बताया कि बिहार को 3,099 प्राइमरी हेल्थ सेंटर चाहिए पर उपलब्ध केवल 1,899 है।
4. संसद में यह भी बताया गया कि बिहार में 774 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र 150 ही हैं। इन कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में जहां 150 डॉक्टर होने चाहिए लेकिन यहां केवल मात्र 8 डॉक्टर हैं। मोदी सरकार ने यह कमी 2011 की जनगणना के आधार पर बताई है मगर आज 2020 की जनसंख्या के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में कमी और भयावह है।
कांग्रेस ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए आगे कहा कि बिहार में नौनिहालों और माताओं के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ किया गया है। स्वास्थ सेवाओं की बदहाली का परिणाम यह है कि जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 48.3 प्रतिशत बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार हैं यानी लगभग 2.30 करोड़ बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं। चिंता की बात यह है कि बिहार में सरकार की लापरवाही से 75,000 बच्चे जन्म के पहले माह में ही मौत के आगोश में समा जाते हैं। यही नहीं 6 महीने से 59 महीने के 63.5 प्रतिशत बच्चे खून की कमी के शिकार हैं। एनडीए सरकार के लिए सबसे बेहद शर्मनाक बात यह है कि बिहार में सिर्फ 9.7% गर्भवती माताओं को 100 दिन तक की अनिवार्य फोलिक एसिड की दवाई दी जाती है, जो कि देश में सबसे कम है। इसके परिणामस्वरूप 58% गर्भवती माताएं खून की कमी की शिकार हो रही है। इतना ही नहीं, 15 से 49 साल की 60.4 प्रतिशत बिहार की महिलाएं खून की कमी की शिकार हैं। बिहार में सिर्फ 3.3 प्रतिशत महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान पूरा चेकअप किया जाता है, जो देश में सबसे कम है।

You may have missed