‘आ बैल मुझे मार’ की कहावत चरितार्थ हो रही फतुहा डाकघर में
फतुहा। बैंको के बाद अब फतुहा डाकघर में सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ने लगी है। लोग विभिन्न योजनाओं के तहत डाकघर खाते खुलवाने के लिए सुबह से ही इस तरह जुटने लगे हैं जैसे शहद के छत्ते पर मधुमक्खियां। खाता खुलवाने के चाह में लोग लॉक डाउन के सारे नियम कानून ताक पर रखकर डाकघर परिसर में भीड़ लगाए हुए हैं। कोई जनधन योजना का खाता खुलवाने के लिए मजमा लगाए हुए हैं तो कोई अन्य योजना के तहत खाते खुलवाने के लिए। हालांकि डाकघर कर्मियों के द्वारा सोशल डिस्टेंस बनाते हुए काउंटर पर आने को बार-बार कह रहे हैं लेकिन लोगों को तो सिर्फ खाता खुलवाने की जल्दी है। कोरोना संक्रमण की संख्या बढ़ने पर भी लोग जागरुक नहीं हैं तो इस स्थिति में लोगों को समझाना ‘आ बैल मुझे मार’ की कहावत चरितार्थ कर रही है।


