कम गति वाली ट्रेनों से हटेगा सुपरफास्ट दर्जा, यात्रियों को किराए में मिलेगी राहत
- रेलवे बोर्ड के निर्देश पर बड़ा फैसला, बिहार समेत पूरे देश के यात्रियों को फायदा
- गति मानक से कम चलने वाली ट्रेनों पर कार्रवाई, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की पहल
पटना। पटना जंक्शन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रेल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कम गति से चलने वाली ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटाने का निर्देश जारी किया है। इस फैसले के लागू होने के बाद यात्रियों को टिकट पर लगने वाले अतिरिक्त सुपरफास्ट शुल्क से छुटकारा मिलेगा, जिससे किराए में सीधी कमी आएगी। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पूर्व मध्य रेलवे ने अपने वाणिज्य विभाग को इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं। इस निर्णय का प्रभाव पटना सहित बिहार के विभिन्न हिस्सों के यात्रियों पर पड़ेगा और उन्हें प्रति टिकट लगभग 15 से 75 रुपये तक की बचत होगी। यह कदम रेलवे द्वारा सेवा और शुल्क के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जिन ट्रेनों की औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटा से कम पाई गई है, उनसे सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया गया है। नियमों के तहत किसी भी ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में बनाए रखने के लिए न्यूनतम 55 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत गति बनाए रखना अनिवार्य होता है। हालांकि कई ट्रेनें कागजों में सुपरफास्ट के रूप में दर्ज थीं, जबकि उनकी वास्तविक गति इस मानक से काफी कम थी। इसी विसंगति को दूर करने के उद्देश्य से रेलवे ने यह निर्णय लिया है, ताकि यात्रियों से केवल उसी सेवा के अनुरूप शुल्क लिया जाए जो उन्हें वास्तव में प्राप्त हो रही है। इस फैसले के तहत विभूति एक्सप्रेस, उपासना एक्सप्रेस, कुंभ एक्सप्रेस और हिमगिरी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया गया है। किराए में कमी का असर विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा। सामान्य श्रेणी के यात्रियों को लगभग 15 रुपये तक की राहत मिलेगी, जबकि शयनयान श्रेणी में करीब 30 रुपये की कमी होगी। वातानुकूलित तृतीय और द्वितीय श्रेणी में लगभग 45 रुपये तक की बचत होगी, वहीं प्रथम वातानुकूलित श्रेणी में भी मामूली कमी देखने को मिलेगी। कुल मिलाकर यात्रियों को 5 से 12 प्रतिशत तक किराए में राहत मिलने का अनुमान है। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि सुपरफास्ट दर्जा हटने के बाद ट्रेनों की समय सारणी में बदलाव हो सकता है और यात्रा अवधि में थोड़ा इजाफा हो सकता है। लेकिन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता किराए में पारदर्शिता लाना है, ताकि यात्रियों को उचित शुल्क पर यात्रा सुविधा मिल सके। इस निर्णय की पृष्ठभूमि में संसद की एक समिति की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में यह पाया गया कि दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-देहरादून और जम्मू मार्ग पर कई ट्रेनें सुपरफास्ट के नाम पर चलाई जा रही हैं, जबकि उनकी वास्तविक गति निर्धारित मानकों से कम है। समिति ने इस पर चिंता जताते हुए रेलवे से आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। रेलवे ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पूरे देश में व्यापक समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी 17 रेलवे जोनों में लगभग 900 ट्रेनों की गति और संचालन का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस समीक्षा के आधार पर आगे दो प्रकार के निर्णय लिए जा सकते हैं—या तो ट्रेनों की गति बढ़ाई जाएगी या फिर उनका सुपरफास्ट दर्जा हटाकर किराया कम किया जाएगा। इस फैसले से सबसे अधिक लाभ उन यात्रियों को मिलेगा जो नियमित रूप से ट्रेन से यात्रा करते हैं। अब उन्हें बिना कारण अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। साथ ही, यह निर्णय रेलवे की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल न केवल यात्रियों की आर्थिक राहत सुनिश्चित करेगी, बल्कि रेलवे सेवाओं में सुधार की दिशा में भी सकारात्मक संकेत देती है। आने वाले समय में यदि ट्रेनों की गति में सुधार होता है, तो यात्रियों को और बेहतर और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिल सकेगा।


