उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके, दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में दहशत

  • अफगानिस्तान के हिंदुकुश क्षेत्र में केंद्र, 5.9 तीव्रता से कांपी धरती
  • कई राज्यों में लोग घरों से बाहर निकले, अब तक किसी नुकसान की खबर नहीं

नई दिल्ली। शुक्रवार, 3 अप्रैल की रात उत्तर भारत के कई हिस्सों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान में भी धरती कांपने से लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी प्रकार की जान-माल की हानि की सूचना नहीं मिली है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदुकुश पर्वतीय क्षेत्र में स्थित था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 5.9 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र 36.52 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 71.01 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था, जबकि इसकी गहराई लगभग 175 किलोमीटर मापी गई। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में भूकंप के झटके लगभग 10 से 15 सेकंड तक महसूस किए गए। वहीं दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों ने कुछ सेकंड तक कंपन का अनुभव किया। कई जगहों पर लोग डर के कारण अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर एकत्र हो गए। भूकंप के झटके केवल भारत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में भी महसूस किए गए। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों और तिब्बत में भी हल्के झटके दर्ज किए गए। तिब्बत में भूकंप की तीव्रता 3.2 मापी गई, जो अपेक्षाकृत कम थी। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और सभी संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी भी प्रकार के नुकसान या जनहानि की कोई सूचना नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदुकुश क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, जहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। यह क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण सक्रिय रहता है। भूकंप के वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डालते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि यह घटना पृथ्वी की सतह के अचानक हिलने या कंपन से जुड़ी होती है। पृथ्वी की बाहरी परत, जिसे स्थलमंडल कहा जाता है, कई बड़ी प्लेटों में विभाजित होती है। ये प्लेटें धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं और उनके बीच घर्षण के कारण तनाव उत्पन्न होता है। जब यह तनाव अत्यधिक बढ़ जाता है और चट्टानें इसे सहन नहीं कर पातीं, तो वे अचानक टूट जाती हैं या खिसक जाती हैं। इससे ऊर्जा निकलती है, जो भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और सतह पर कंपन उत्पन्न करती है। इसी प्रक्रिया के कारण भूकंप के झटके महसूस होते हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर जाएं और खुले क्षेत्र में रहें। साथ ही ऊंची इमारतों और बिजली के खंभों से दूर रहने की भी हिदायत दी गई है। इस भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहना कितना आवश्यक है। हालांकि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता और तैयारी बेहद जरूरी है।

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