बिहार में सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती, नई आचार नियमावली लागू

  • बिना अनुमति सरकार, न्यायालय या नीतियों पर टिप्पणी करना होगा दंडनीय
  • फर्जी पहचान, दफ्तर के वीडियो और राजनीतिक पोस्ट पर भी पूर्ण प्रतिबंध

पटना। बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। जनवरी 2026 में स्वीकृत बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 के तहत अब कर्मचारियों की डिजिटल गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इस संशोधन को राज्यपाल द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लागू किया गया है और यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी हो चुका है। नई नियमावली का उद्देश्य सरकारी तंत्र की छवि को सुरक्षित रखना और कर्मचारियों के बीच अनुशासन को मजबूत करना है। डिजिटल युग में बढ़ते सोशल मीडिया प्रभाव को देखते हुए सरकार ने यह कदम आवश्यक बताया है। अधिकारियों का मानना है कि कई बार कर्मचारियों की अनियंत्रित टिप्पणियां और गतिविधियां प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। नियमों के अनुसार, अब कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के सामाजिक मीडिया मंचों जैसे फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर सरकार की नीतियों, योजनाओं या न्यायालयों के फैसलों पर अपनी निजी राय व्यक्त नहीं कर सकेगा। विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय से संबंधित मामलों पर टिप्पणी करना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यदि कोई कर्मचारी इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे कदाचार मानते हुए विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी ईमेल या आधिकारिक मोबाइल नंबर का उपयोग निजी सामाजिक मीडिया खाते बनाने या संचालित करने में नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, गुमनाम या छद्म नाम से खाते चलाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रावधान का उद्देश्य फर्जी पहचान के माध्यम से अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाना है। कार्यालय परिसर के भीतर भी कई नई पाबंदियां लागू की गई हैं। अब कोई भी कर्मचारी दफ्तर के अंदर वीडियो बनाना, लघु वीडियो तैयार करना या बैठकों का सीधा प्रसारण नहीं कर सकेगा। कार्यालय से संबंधित किसी भी प्रकार की तस्वीर, वीडियो या गोपनीय दस्तावेज को सार्वजनिक मंचों पर साझा करना गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को सामाजिक मीडिया पर किसी भी राजनीतिक दल, समाचार संस्थान या विशिष्ट व्यक्तित्व के समर्थन या विरोध में टिप्पणी करने से भी रोका गया है। जाति, धर्म या अन्य संवेदनशील विषयों पर भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट करना भी पूर्णतः निषिद्ध कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने को लेकर भी नियम कड़े किए गए हैं। अब सरकारी कर्मचारी अपनी सेवा अवधि के दौरान केवल एक बार ही अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर किसी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। पहले यह सीमा पांच बार तक निर्धारित थी। इस बदलाव को प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से जोड़ा जा रहा है। नई नियमावली लागू होने के बाद सरकारी महकमे में सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है। कर्मचारी अब अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर अधिक सावधान हो गए हैं। हर पोस्ट, टिप्पणी और साझा की जाने वाली सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा, हालांकि इसके प्रभावों पर चर्चा भी जारी है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रही है। बिहार सरकार का यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि अब डिजिटल मंचों पर सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त आचार संहिता लागू होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई तय है, जिससे प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

You may have missed