February 1, 2026

देश में स्कूल, कॉलेज और नेशनल हाईवे से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। देश में आवारा कुत्तों और पशुओं की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश अब पूरे देश में लागू होगा। इसके तहत सभी नेशनल और स्टेट हाईवे, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल परिसरों से आवारा पशुओं और कुत्तों को हटाया जाएगा। अदालत ने कहा कि सभी राज्यों के मुख्य सचिव यह सुनिश्चित करें कि आदेश का सख्ती से पालन किया जाए और तीन सप्ताह के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट हलफनामे के साथ अदालत में जमा करें।
राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश बना देशव्यापी दिशानिर्देश
तीन महीने पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को आदेश दिया था कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा पशुओं को हटाया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि कोई व्यक्ति इस कार्रवाई में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पूरे देश में लागू करते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्देश राष्ट्रीय स्तर पर लागू होंगे। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं, अस्पतालों और शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह कदम अत्यंत आवश्यक है।
हाईवे पर आवारा पशुओं को लेकर सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर अक्सर आवारा पशु और कुत्ते घूमते रहते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि सभी हाईवे को पशु-मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही, अदालत ने आदेश दिया कि प्रत्येक राज्य अपने हाईवे पर एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करे, जिसके माध्यम से आम नागरिक सड़क पर आवारा पशु या कुत्ते की मौजूदगी की सूचना दे सकें। इन सूचनाओं पर स्थानीय प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों में बाड़ लगाने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों की पहचान करें, जहां आवारा कुत्ते या पशु आते हैं। इन परिसरों में उनकी एंट्री रोकने के लिए चारों ओर बाड़ लगाई जाए। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एक नोडल अधिकारी को दी जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगा कि परिसर में कोई आवारा जानवर प्रवेश न करे। अदालत ने यह भी कहा कि नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत संस्थाएं हर तीन महीने में इन परिसरों का निरीक्षण करें और अपनी रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को सौंपें।
पकड़े गए कुत्तों को वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह रहा कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। अदालत ने कहा कि यह प्रथा असुरक्षित है और इससे समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ती है। इसलिए इन कुत्तों को निर्धारित पशु आश्रयों या नगर निगम द्वारा बनाए गए शेल्टर होम में रखा जाए, जहां उनकी देखभाल और नसबंदी की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
राज्यों को तीन सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश का पालन हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में किया जाएगा। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करना होगा। यह रिपोर्ट इस बात की जानकारी देगी कि हाईवे, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों में आवारा कुत्तों और पशुओं को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही, यह भी बताया जाएगा कि हेल्पलाइन नंबर कब और कैसे शुरू किया गया तथा स्थानीय प्रशासन ने कितनी शिकायतों पर कार्रवाई की।
सुरक्षा और जनहित के लिहाज से अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कदम न केवल सुरक्षा बल्कि जनहित के लिए भी आवश्यक है। हाल के वर्षों में आवारा कुत्तों के हमलों और सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। कई मामलों में बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर घायल हुए हैं, जबकि कुछ घटनाओं में जान भी चली गई है। अदालत ने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। इस दिशा में यह आदेश एक ठोस कदम साबित होगा। अदालत ने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में केवल “औपचारिक कार्रवाई” नहीं, बल्कि “व्यावहारिक समाधान” लागू करना होगा।
नगर निकायों और स्थानीय संस्थाओं की जवाबदेही तय
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों, नगर परिषदों और पंचायतों को भी इस प्रक्रिया में जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें नियमित रूप से अपने क्षेत्र में निगरानी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक स्थलों पर आवारा जानवरों की संख्या नियंत्रित रहे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में इस आदेश का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल आवारा कुत्तों और पशुओं की समस्या को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह नागरिक सुरक्षा, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। देश में हर साल हजारों सड़क दुर्घटनाएं आवारा जानवरों के कारण होती हैं, वहीं स्कूलों और अस्पतालों के परिसरों में भी इनकी बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उम्मीद है कि प्रशासनिक तंत्र अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करेगा और नागरिकों को राहत मिलेगी। आगामी 13 जनवरी को इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें अदालत राज्यों द्वारा दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। यह फैसला आने वाले दिनों में देश की शहरी व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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