February 23, 2026

पटना में खुले में थूकने पर लगेगा जुर्माना, 3300 सीसीटीवी से होगी निगरानी, 500 रुपये का लगेगा फाइन

पटना। राजधानी पटना में अब खुले में थूकना लोगों को भारी पड़ने वाला है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए पटना नगर निगम ने कड़ा फैसला लिया है। पान, गुटखा या अन्य पदार्थ खाकर सार्वजनिक स्थानों पर थूकते हुए पकड़े जाने पर अब सीधे 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम का मानना है कि इस तरह की सख्ती से लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा होगा और शहर की साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा।
सीसीटीवी से होगी निगरानी
नगर निगम ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। पटना शहर में लगे लगभग 3300 सीसीटीवी कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है। इन कैमरों के जरिए शहर के प्रमुख चौराहों, सड़कों, फ्लाइओवरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की लगातार निगरानी की जाएगी। खुले में थूकते हुए व्यक्ति की पहचान सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से की जाएगी और उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
तस्वीरें होंगी सार्वजनिक
इस अभियान की एक खास बात यह है कि खुले में थूकते हुए पकड़े गए लोगों की तस्वीरें वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले स्क्रीन पर भी प्रदर्शित की जाएंगी। नगर निगम का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता पैदा करना है। ऐसे लोगों को प्रतीकात्मक रूप से नगर शत्रु की श्रेणी में रखा जाएगा, ताकि दूसरों को भी यह संदेश जाए कि सार्वजनिक स्थानों को गंदा करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खुले में पेशाब पर भी कार्रवाई
नगर निगम की यह सख्ती केवल थूकने तक सीमित नहीं है। खुले में पेशाब करने वालों पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। निगम की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चौकन्ना रहकर मौके पर ही कार्रवाई करें। सीसीटीवी निगरानी के साथ-साथ फील्ड में तैनात कर्मियों को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है।
नगर आयुक्त के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई
यह पूरा अभियान पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा के निर्देश पर शुरू किया गया है। नगर आयुक्त का कहना है कि पान और गुटखा खाकर थूकने से शहर की छवि खराब हो रही है। कई प्रमुख चौराहे, फ्लाइओवर और सड़क किनारे रेड स्पॉट बन चुके हैं, जहां दीवारें और सड़कें गंदगी से भरी रहती हैं। इस पहल का मकसद इन स्थानों को साफ करना और दोबारा गंदगी फैलने से रोकना है।
पहले से चल रही है कार्रवाई
नगर निगम पहले भी कुछ खास इलाकों में इस तरह की कार्रवाई कर चुका है। मल्टी मॉडल हब से पटना जंक्शन को जोड़ने वाली भूमिगत सब-वे में खुले में थूकने के मामलों पर पहले से सख्ती बरती जा रही है। यहां अब तक करीब 250 लोगों से जुर्माना वसूला जा चुका है। इस सब-वे में थूकने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। दिसंबर महीने में यहां सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई थी, जब करीब 156 लोगों को थूकते हुए पकड़ा गया था।
स्वच्छता रैंकिंग सुधारने की कोशिश
नगर निगम का मानना है कि अगर लोग सार्वजनिक स्थानों पर थूकना और गंदगी फैलाना बंद कर दें, तो शहर की स्वच्छता रैंकिंग में बड़ा सुधार हो सकता है। स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल निगम की सफाई व्यवस्था ही नहीं, बल्कि नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है। यही वजह है कि यह अभियान दंड के साथ-साथ जागरूकता पर भी केंद्रित है।
नागरिकों से सहयोग की अपील
पटना नगर निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें। अगर कहीं कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान को गंदा करता हुआ नजर आए, तो इसकी सूचना तुरंत नगर निगम के टॉल फ्री नंबर 155304 पर दी जा सकती है। निगम का कहना है कि नागरिकों की सहभागिता से ही शहर को स्वच्छ और रहने लायक बनाया जा सकता है।
स्वच्छता और शहर की सुंदरता
शहर की सुंदरता केवल इमारतों और सड़कों से नहीं, बल्कि साफ-सफाई और नागरिक अनुशासन से भी जुड़ी होती है। खुले में थूकने की आदत न केवल गंदगी फैलाती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी नुकसानदायक है। नगर निगम का मानना है कि जब लोग सार्वजनिक स्थानों को अपना समझकर साफ रखने लगेंगे, तभी पटना एक स्वच्छ और सुंदर राजधानी के रूप में उभर सकेगा।
तकनीक और प्रशासन का संयुक्त प्रयास
इस अभियान में तकनीक और प्रशासन दोनों का तालमेल देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां सीसीटीवी और कमांड सेंटर के जरिए निगरानी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर फील्ड में तैनात कर्मचारी तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं। यह दिखाता है कि नगर निगम अब केवल अपीलों पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने के लिए तैयार है। पटना में खुले में थूकने पर जुर्माने और सीसीटीवी निगरानी की यह व्यवस्था शहर की स्वच्छता के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। 500 रुपये का फाइन, तस्वीरों का सार्वजनिक प्रदर्शन और लगातार निगरानी से यह उम्मीद की जा रही है कि लोग अपनी आदतों में बदलाव लाएंगे। यदि यह अभियान सफल होता है, तो न केवल पटना की स्वच्छता रैंकिंग सुधरेगी, बल्कि शहर की छवि भी एक साफ और सुसंस्कृत राजधानी के रूप में और निखरेगी।

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