बिहार में पंचायत सचिवों की हड़ताल से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित, ग्रामीण सेवाएं ठप

  • राजस्व कर्मचारियों के बाद पंचायत सचिव भी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर, कामकाज में आई गंभीर बाधा
  • प्रमाण पत्र, पेंशन और विकास योजनाओं पर असर, सरकार से मांगों के समाधान की उठी आवाज

पटना। बिहार में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली एक बार फिर व्यापक रूप से प्रभावित होती नजर आ रही है। पहले से ही राजस्व कर्मचारी, अंचल अधिकारी और राजस्व पदाधिकारी हड़ताल पर थे, ऐसे में अब पंचायत सचिवों के भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर प्रखंड और अंचल स्तर तक प्रशासनिक कामकाज लगभग ठप पड़ गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के आह्वान पर पंचायत सचिवों ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है। संघ का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है और सरकार द्वारा ठोस निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं। ऐसे में मजबूरीवश उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। पंचायत सचिवों की प्रमुख मांगों में गृह जिले में पदस्थापना, वेतन श्रेणी में बढ़ोतरी, यात्रा भत्ता की सुविधा, पदोन्नति में आयु सीमा समाप्त करना तथा शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पंचायत राज पदाधिकारी के पद पर पदोन्नति देना शामिल है। संघ के पदाधिकारियों ने पंचायती राज विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने कई बार आश्वासन तो दिए, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया। पंचायत सचिवों का कहना है कि वे ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं, इसके बावजूद उनके हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस हड़ताल का सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है। गांवों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड में नाम जोड़ने या संशोधन करने जैसे आवश्यक कार्य भी ठप हो गए हैं। पंचायत स्तर पर संचालित विकास योजनाओं की गति भी धीमी पड़ गई है या कई स्थानों पर पूरी तरह रुक गई है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं और उन्हें अपने जरूरी कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई जगहों पर फाइलों का निपटारा पूरी तरह रुक गया है। गौरतलब है कि बिहार में पहले से ही राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल जारी थी। उस दौरान पंचायत सचिवों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, ताकि प्रशासनिक कार्यों को किसी तरह संचालित किया जा सके। लेकिन अब पंचायत सचिवों के भी हड़ताल पर चले जाने से प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। प्रखंड और अंचल कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज लगभग बंद हो गया है। हालांकि इस आंदोलन से पुराने पंचायत सचिव और जनसेवकों को अलग रखा गया है, फिर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। सीमित कर्मचारियों के सहारे काम चलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कार्य की गति बेहद धीमी हो गई है और आम लोगों को समय पर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। पंचायत सचिवों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राज्य सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों की अनुपस्थिति से जनता में असंतोष बढ़ने की संभावना है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो यह असंतोष व्यापक रूप ले सकता है।

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