सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने को ‘शनिवार मंथन’ की पहल, नए तरीकों पर होगा मंथन

  • बुनियादी शिक्षा में कमी पर विभाग सख्त, अब अनुभव साझा कर सीखेंगे शिक्षक

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। बीएड और डीएलएड जैसी पेशेवर डिग्रियां, शिक्षक पात्रता परीक्षाएं और नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बावजूद बच्चों की बुनियादी शिक्षा कमजोर बनी हुई है। हाल ही में शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में सामने आया है कि कक्षा तीन से छह तक के कई छात्र अब भी जोड़, घटाव, गुणा, भाग और भाषा की मूल समझ में पिछड़ रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने एक नई पहल शुरू की है, जिसे ‘शनिवार मंथन’ नाम दिया गया है। इस पहल के तहत अब हर शनिवार शिक्षकों को संकुल स्तर पर एकत्र होकर पढ़ाने के बेहतर तरीकों पर चर्चा करनी होगी। इसे पारंपरिक प्रशिक्षण से अलग रखते हुए अनुभवों के आदान-प्रदान का मंच बताया गया है, जहां शिक्षक अपने अनुभव, समस्याएं और समाधान साझा करेंगे। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि यह पहल शिक्षकों को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी शिक्षण विधियां अपनाने में मदद करेगी। शनिवार को होने वाली यह बैठक कुल दो घंटे पंद्रह मिनट की होगी, जिसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में कक्षा एक से तीन तक के शिक्षक प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। दूसरे चरण में पाठ्यपुस्तकों के आधार पर पढ़ाने के तरीकों और बच्चों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। विशेष रूप से भाषा और गणित विषयों को मजबूत करने के लिए नए उपायों पर जोर दिया जाएगा। इसमें शिक्षण से जुड़े अभिलेखों के रखरखाव और बच्चों की प्रगति को दर्ज करने के तरीकों पर भी चर्चा होगी। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में शिक्षक अपनी पाठ योजना प्रस्तुत करेंगे। इसमें इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि पढ़ाई को कैसे रोचक और प्रभावी बनाया जाए। साथ ही यह भी समझने का प्रयास होगा कि बच्चों के पूर्व ज्ञान को नई जानकारी से कैसे जोड़ा जाए, ताकि उनकी समझ मजबूत हो सके। इस पहल को व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए विषयवार कार्यक्रम भी तैयार किया गया है। पहले शनिवार को कक्षा एक से तीन के शिक्षक, दूसरे शनिवार को कक्षा चार और पांच के शिक्षक, तीसरे शनिवार को भाषा और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक तथा चौथे शनिवार को गणित और विज्ञान के शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि राज्य भर के लगभग एक लाख शिक्षक हर सप्ताह इस मंथन में भाग लेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता और उनके मानसिक स्तर को समझना है। अब जोर केवल पाठ्यक्रम पूरा करने पर नहीं, बल्कि इस बात पर होगा कि छात्र वास्तव में कितना सीख पा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पहल को सही तरीके से लागू किया गया, तो सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षकों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान उन्हें नई दृष्टि देगा और वे अपने शिक्षण तरीके में सुधार कर सकेंगे। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि इस योजना की नियमित निगरानी नहीं की गई, तो यह केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। इसलिए इसके प्रभावी क्रियान्वयन और मूल्यांकन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा। शनिवार मंथन’ पहल बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह देखना होगा कि यह प्रयास जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और क्या इससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा में वास्तविक सुधार हो पाता है।

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