वैशाली महोत्सव में भोजपुरी नाइट के दौरान हंगामा, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
- लोक गायिका कल्पना पटवारी के मंच संभालने के कुछ देर बाद ही बेकाबू हुई भीड़
- अफरा-तफरी के बाद प्रशासन ने संभाला मोर्चा, कार्यक्रम दोबारा कराया गया शुरू
वैशाली। बिहार के चर्चित सांस्कृतिक आयोजन वैशाली महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित भोजपुरी संध्या के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यक्रम के बीच अचानक भीड़ बेकाबू हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा। हालांकि बाद में हालात पर काबू पा लिया गया और कार्यक्रम को दोबारा शुरू कराया गया। जानकारी के अनुसार, भोजपुरी संध्या में प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी की प्रस्तुति निर्धारित थी। जैसे ही उन्होंने मंच संभाला, दर्शकों में भारी उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे और माहौल पूरी तरह उत्सवमय था। कल्पना पटवारी ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत छठ पूजा के प्रसिद्ध गीत “उग हे सूर्य देव…” से की, जिसे सुनकर दर्शक झूम उठे। प्रस्तुति के दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों को भी उठाया। नालंदा में हाल ही में हुई सामूहिक दुष्कर्म के प्रयास की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया। इसके बाद उन्होंने भोजपुरी लोकनाट्य के जनक भिखारी ठाकुर का प्रसिद्ध गीत “बेटी बेचवा” प्रस्तुत किया, जिसने माहौल को कुछ समय के लिए भावुक बना दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने “बलमुवा कैसे तेजब, हे छोटी ननदी” सहित कई लोकप्रिय गीत गाए, जिन पर दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ प्रतिक्रिया दी। हालांकि, कार्यक्रम के लगभग आधे घंटे बाद ही स्थिति अचानक बदल गई। भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अनुशासन तोड़ते हुए कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। भीड़ के इस उग्र रूप को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिस बल ने तुरंत हस्तक्षेप किया। पहले लोगों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी तो पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस कार्रवाई के बाद उपद्रवी तत्व वहां से हट गए और हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और उपद्रवियों को कड़ी चेतावनी दी। प्रशासन ने साफ किया कि इस तरह के आयोजनों में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थिति सामान्य होने के बाद कार्यक्रम को पुनः शुरू किया गया। कल्पना पटवारी ने फिर से मंच संभाला और अपनी प्रस्तुति जारी रखी। इसके बाद कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, हालांकि पूरे समय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भीड़ पर कड़ी नजर रखनी पड़ी। इस दौरान दर्शकों की भारी भीड़ बनी रही, जिससे आयोजन स्थल पर लगातार दबाव बना रहा। भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आयोजन समिति के सदस्यों ने भी व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। इस घटना ने एक बार फिर बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की आवश्यकता को उजागर किया है। हालांकि प्रशासन की तत्परता से स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई, लेकिन इस तरह की घटनाएं भविष्य में और अधिक सतर्कता बरतने की ओर संकेत करती हैं।


