February 26, 2026

श्रीनगर में 12 से अधिक जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, साइबर फ्रॉड ओर टेरर फंडिंग के खिलाफ हुई कार्रवाई

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बुधवार को सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी और समन्वित कार्रवाई को अंजाम दिया। साइबर फ्रॉड और टेरर फंडिंग से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने घाटी में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर के नेतृत्व में की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य साइबर माध्यम से होने वाले अवैध लेन-देन और आतंकी फंडिंग से जुड़े खातों तथा व्यक्तियों की पहचान करना था।
एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
अधिकारियों के अनुसार, सुबह-सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत केवल श्रीनगर शहर में ही 12 से अधिक स्थानों पर छापे मारे गए। इसके अलावा आसपास के कुछ इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया गया। यह रेड पूरी तरह गोपनीय योजना के तहत की गई थी ताकि संदिग्धों को पहले से भनक न लगे। पुलिस का मानना है कि साइबर फ्रॉड के जरिए जुटाई गई रकम को आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा था, इसलिए इस नेटवर्क को तोड़ना बेहद जरूरी था।
टेरर फंडिंग और साइबर अपराध पर फोकस
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का मुख्य फोकस टेरर फंडिंग से जुड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन-किन खातों के जरिए अवैध तरीके से पैसा इधर-उधर किया गया और कौन लोग इस पूरे गिरोह का हिस्सा हैं। शुरुआती जांच में कुछ संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन और बैंक खातों की जानकारी सामने आई है, जिनकी गहन जांच की जा रही है।
काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर की भूमिका
इस पूरी कार्रवाई की कमान काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर ने संभाली। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन पर की जा रही कार्रवाई नहीं है, बल्कि वर्चुअल दुनिया में भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साइबर स्पेस में होने वाली हर गतिविधि की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की आतंकी फंडिंग को समय रहते रोका जा सके।
वीपीएन के इस्तेमाल पर सख्ती
इस अभियान के साथ-साथ घाटी में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। पुलिस ने सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए वीपीएन के उपयोग पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वीपीएन का इस्तेमाल कई बार संदिग्ध गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जाता है, जिससे साइबर अपराध और टेरर फंडिंग को बढ़ावा मिल सकता है।
पुलवामा और कुलगाम में कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, वीपीएन बैन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया है। पिछले एक सप्ताह में कश्मीर में 140 से अधिक लोगों की पहचान की गई है, जिन्होंने प्रतिबंध के बावजूद वीपीएन का इस्तेमाल किया। इनमें से अकेले पुलवामा जिले में करीब 100 लोगों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा कुलगाम और पुलवामा जिलों में 49 लोगों के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई शुरू की गई है।
वेरिफिकेशन ड्राइव और कानूनी कदम
अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया एक वेरिफिकेशन ड्राइव के तहत की गई। इसमें उन लोगों की पहचान की गई, जो सुरक्षा आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अभी तक कई मामलों में जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
टेक एक्सपर्ट्स की चिंता
इस कार्रवाई का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। टेक्नोलॉजी और आईटी क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वीपीएन पर सख्ती से कामकाज पर असर पड़ सकता है। कई प्रोफेशनल्स सुरक्षित कनेक्शन के लिए वीपीएन का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, पुलिस का तर्क है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह के जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ी
इन छापेमारियों के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां जमीन पर और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि साइबर फ्रॉड और टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों में लगातार नए इनपुट मिल रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी का इंतजार
जब यह रिपोर्ट तैयार की जा रही थी, उस समय भी कई स्थानों पर तलाशी अभियान जारी था। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। अभी तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियां इसे एक बड़ी सफलता की दिशा में अहम कदम मान रही हैं। श्रीनगर में हुई यह ताबड़तोड़ छापेमारी इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में साइबर अपराध और टेरर फंडिंग के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां अब ज्यादा आक्रामक और तकनीकी रूप से तैयार हैं। जमीन और ऑनलाइन दुनिया दोनों में चल रही यह कार्रवाई आने वाले समय में घाटी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर सकती है। प्रशासन का साफ संदेश है कि कानून तोड़ने वालों और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी।

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