बिहार में सत्ता परिवर्तन जल्द, सियासी उठापटक जारी, नीतीश करेंगे मुख्यमंत्री का चेहरा

  • मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सियासी समीकरण बदले, महागठबंधन को झटका
  • भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना, उपमुख्यमंत्री पद पर बना संशय

पटना। बिहार की राजनीति में पिछले डेढ़ महीने से चल रहा सस्पेंस अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। लगातार बैठकों, कयासों और राजनीतिक रणनीतियों के बीच अब संकेत स्पष्ट हैं कि राज्य में एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की उम्मीदों को इस पूरे घटनाक्रम में बड़ा झटका लगा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत मार्च महीने की शुरुआत में हुई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की थी। 5 मार्च को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि वे अब तक लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं, लेकिन राज्यसभा का अनुभव उन्हें नहीं मिला है। इस कारण वे अब राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। हालांकि उनके इस बयान के बाद भी बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर जारी रहा। 30 मार्च को उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया, जिसके बाद कुछ हद तक स्थिति स्पष्ट हुई, लेकिन सियासी हलकों में ‘खेला’ की चर्चाएं जारी रहीं। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच संभावित समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं। इस पूरे घटनाक्रम में महागठबंधन की भूमिका भी अहम रही। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला गठबंधन इस उम्मीद में था कि एक बार फिर परिस्थितियां उनके पक्ष में बदल सकती हैं। इससे पहले वर्ष 2015 और 2022 में हुए राजनीतिक बदलावों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया था कि स्थिति अचानक बदल सकती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और उनकी उम्मीदों को झटका लगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष ने जानबूझकर भ्रम की स्थिति बनाए रखी, ताकि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर असमंजस पैदा किया जा सके। हालांकि इस रणनीति का कोई ठोस असर नहीं दिखा। दिलचस्प बात यह रही कि इस भ्रम की स्थिति में जनता दल यूनाइटेड के कुछ नेता भी शामिल नजर आए, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से नीतीश कुमार से बिहार की राजनीति में बने रहने की अपील की। इसी दौरान मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में आया। पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठाई। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह मुद्दा अभी भी विचाराधीन बताया जा रहा है। दिल्ली में इस दौरान कई दौर की बैठकें हुईं, जिनमें जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इन बैठकों में नई सरकार के गठन का खाका तैयार किया गया। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि मुख्यमंत्री का पद भारतीय जनता पार्टी के पास जाएगा। इसके साथ ही गृह मंत्रालय भी उसी के पास रहने की संभावना है। यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ माना जा रहा है। वहीं उपमुख्यमंत्री के पद को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। जनता दल यूनाइटेड के भीतर इस बात पर मंथन जारी है कि इस पद के लिए किसे आगे किया जाए। हालांकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम निर्णय नीतीश कुमार के हाथ में है। इस पूरे घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार अब राज्य की राजनीति से हटकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो बिहार की राजनीति में नेतृत्व का एक नया अध्याय शुरू होगा। दूसरी ओर, महागठबंधन के लिए यह समय आत्ममंथन का माना जा रहा है। खासकर तेजस्वी यादव के लिए यह एक संकेत है कि उन्हें अपनी राजनीतिक रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा और संगठन को मजबूत बनाने पर ध्यान देना होगा। बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। आने वाले कुछ दिनों में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा के साथ यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथों में जाएगी और भविष्य की राजनीतिक दिशा क्या होगी।

 

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