देश में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, एटीएस ने पकड़ा बड़ा नेटवर्क, कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी

  • टेलीग्राम समूहों के जरिए युवाओं को जोड़कर भड़काया जा रहा था
  • पाकिस्तानी संचालकों से संपर्क, हथियार जुटाने की भी चल रही थी तैयारी

नई दिल्ली। देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है। आतंकवाद निरोधक दस्ता ने एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए कई संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न राज्यों के युवाओं को जोड़कर उन्हें भड़काने और देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियों के अनुसार, यह मामला बेहद गंभीर है और इसके तार देश के बाहर बैठे संचालकों से भी जुड़े हुए पाए गए हैं।
कई राज्यों में फैलाया गया नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन मेरठ निवासी साकिब कर रहा था। उसने उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा और मुंबई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह का संगठित प्रयास देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता था। साकिब ने अपने स्तर पर एक टीम तैयार की और धीरे-धीरे अपने संपर्कों का विस्तार किया।
सामाजिक माध्यम समूहों के जरिए युवाओं को जोड़ा गया
जांच में यह भी सामने आया है कि साकिब ने संदेश प्रसारण मंच पर एक दर्जन से अधिक समूह बनाए थे। इन समूहों के माध्यम से युवाओं तक कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े वीडियो और भड़काऊ संदेश पहुंचाए जाते थे। इन संदेशों का उद्देश्य युवाओं की सोच को प्रभावित करना और उन्हें देश विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार करना था। बताया जा रहा है कि इन समूहों से सैकड़ों युवा जुड़े हुए थे, जिनकी पहचान करने के लिए एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं।
विदेशी संचालकों से संपर्क
सूत्रों के अनुसार, दुबई में मौजूद आकिब नामक व्यक्ति ने साकिब का संपर्क पाकिस्तान में बैठे संचालकों से कराया था। इसके बाद साकिब ने उनके निर्देशों के अनुसार काम करना शुरू किया। जांच में यह संकेत मिले हैं कि विदेशी संचालक इस नेटवर्क को विस्तार देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। यह भी संभावना जताई जा रही है कि विदेश से आर्थिक और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही थी।
हथियार जुटाने की भी तैयारी
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि साकिब पंजाब के कुछ हथियार तस्करों के संपर्क में था। बताया जा रहा है कि वह उनके माध्यम से हथियार खरीदने की योजना बना रहा था। पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि उसने हथियार चलाने का अभ्यास किया था। उसके मोबाइल फोन से ऐसे प्रमाण भी मिले हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि योजना केवल विचार स्तर तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसे क्रियान्वित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे थे।
पहले भी हुआ था मॉड्यूल का खुलासा
दो अप्रैल को आतंकवाद निरोधक दस्ता ने एक ऐसे मॉड्यूल का भी पर्दाफाश किया था जो पाकिस्तानी संचालकों के इशारे पर आतंकी घटनाओं की योजना बना रहा था। उस कार्रवाई में मेरठ के साकिब और अरबाब के अलावा गौतमबुद्ध नगर के लोकेश और विकास को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई हैं।
भड़काऊ वीडियो के माध्यम से मानसिक रूप से तैयार करने की कोशिश
जांच एजेंसियों को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई आपत्तिजनक वीडियो प्राप्त हुए हैं। इनमें पहलगाम आतंकी हमला और दिल्ली विस्फोट से जुड़े दृश्य भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन वीडियो को समूहों में साझा कर युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। धीरे-धीरे उन्हें ऐसी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाता था जिससे देश में भय और अस्थिरता का माहौल पैदा हो सके।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी सतर्कता
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि साकिब जिस प्रकार स्वयं प्रशिक्षित हुआ था, उसी प्रकार वह अन्य युवाओं को भी तैयार करने की योजना बना रहा था। उसका उद्देश्य कम समय में अधिक से अधिक घटनाओं को अंजाम देना था ताकि व्यापक स्तर पर दहशत फैलाई जा सके। फिलहाल आरोपियों की हिरासत अवधि के कुछ दिन शेष हैं और जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
देश की सुरक्षा के लिए चुनौती
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के खिलाफ साजिशें लगातार रची जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसी गतिविधियों पर समय रहते रोक लगाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, एजेंसियों की सक्रियता और सतर्कता के कारण एक बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया है, जिससे संभावित खतरे को टालने में सफलता मिली है। आने वाले समय में भी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा युवाओं को भटकाने वाले तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता बनी रहेगी।

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