February 26, 2026

जेपी गंगा पथ पर बनेगा जयप्रकाश नारायण समाधि स्थल, 10 एकड़ भूमि पार्क में होगी विकसित

पटना। गंगा तट पर आने वाले समय में एक नया ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटक केंद्र आकार लेने जा रहा है। जेपी गंगा पथ के दक्षिण दूजरा क्षेत्र में लोकनायक जयप्रकाश नारायण का समाधि स्थल विकसित किया जाएगा, जबकि बांसघाट के पास लगभग 10 एकड़ भूमि में वेस्ट टू वंडर थीम पार्क का निर्माण होगा। ये दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाएं न सिर्फ पटना की पहचान को नई दिशा देंगी, बल्कि गंगा किनारे के इस पूरे क्षेत्र को श्रद्धा, स्मृति और आधुनिक पर्यटन का संगम बना देंगी।
जयप्रकाश नारायण समाधि स्थल की रूपरेखा
लोकनायक जयप्रकाश नारायण का समाधि स्थल देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समाधि स्थल के समीप, जेपी गंगा पथ के दक्षिण दूजरा इलाके में विकसित किया जाएगा। इसके लिए लगभग 1.75 एकड़ भूमि को चिह्नित किया गया है। इस भूमि में पुराने बांसघाट शवदाह गृह का कुछ हिस्सा भी शामिल है। प्रशासन का उद्देश्य इस क्षेत्र को पूरी तरह सुव्यवस्थित कर एक ऐसा स्थल बनाना है, जो न केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने का केंद्र बने, बल्कि जेपी के विचारों और उनके सामाजिक आंदोलन की स्मृति को भी जीवंत रखे। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने स्थल निरीक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चिन्हित भूमि के आसपास से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाए जाएं। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से काम करने को कहा गया है। प्रशासन चाहता है कि यह समाधि स्थल युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने और लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा जनआंदोलनों के प्रति जागरूकता फैलाए।
वेस्ट टू वंडर थीम पार्क की अवधारणा
जेपी गंगा पथ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समाधि स्थल के बीच स्थित लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में वेस्ट टू वंडर थीम पार्क का विकास किया जाएगा। यह पार्क बिहार के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और महान व्यक्तित्वों को आधुनिक और रचनात्मक शैली में प्रस्तुत करेगा। यहां आर्यभट्ट, चाणक्य, सम्राट अशोक, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और दशरथ मांझी जैसे महापुरुषों की जीवनगाथाओं को दर्शाया जाएगा। इस पार्क की सबसे खास बात यह होगी कि यहां लोहे के कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं से कलात्मक संरचनाएं बनाई जाएंगी। वेस्ट मटेरियल के उपयोग से तैयार की गई ये कलाकृतियां पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देंगी। इतिहास और पर्यावरण चेतना का यह अनूठा मेल इसे राज्य के अन्य पार्कों से अलग पहचान देगा।
परिवार और पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र
वेस्ट टू वंडर थीम पार्क को केवल एक दर्शनीय स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक संपूर्ण अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां परिवारों और पर्यटकों के लिए खाने-पीने की उचित व्यवस्था होगी। बच्चों के लिए खेल के मैदान, खुले हरित क्षेत्र और बैठने की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि लोग यहां समय बिताएं, इतिहास को समझें और साथ ही मनोरंजन का आनंद भी लें। प्रशासन को उम्मीद है कि यह पार्क पटना के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होगा और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
गंगा पथ समग्र उद्यान परियोजना का विस्तार
जिलाधिकारी ने दीघा से सभ्यता द्वार तक विकसित हो रही गंगा पथ समग्र उद्यान परियोजना का भी निरीक्षण किया। इस परियोजना के तहत 387.40 करोड़ रुपये की लागत से दीघा से गांधी मैदान तक गंगा पथ के दोनों ओर लगभग सात किलोमीटर लंबे हरित क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। यह हरित पट्टी शहर को पर्यावरणीय संतुलन देने के साथ-साथ लोगों के लिए सुकून भरा स्थान भी बनेगी। इसके अतिरिक्त, 12.38 करोड़ रुपये की लागत से सभ्यता द्वार से कलेक्ट्रेट घाट तक 450 मीटर लंबा और साढ़े चार मीटर चौड़ा मॉर्निंग वॉक और ट्रैकिंग पथ बनाया जाएगा। इससे मॉर्निंग वॉक करने वालों, पर्यटकों और छठ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिलेगी।
शहरी विकास और व्यवस्थागत सुधार
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि पटना हाट के निर्माण के लिए आयुक्त कार्यालय के सामने स्थित डीएसपी ट्रैफिक कार्यालय को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही ड्रेनेज चैनल और अन्य शहरी समस्याओं के समाधान को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि गंगा तट का विकास केवल सौंदर्य तक सीमित न रहे, बल्कि शहरी सुविधाओं में भी सुधार लाए।
गंगा तट को मिलेगी नई पहचान
जेपी का समाधि स्थल, वेस्ट टू वंडर थीम पार्क और गंगा पथ समग्र उद्यान, ये तीनों परियोजनाएं मिलकर गंगा तट को एक नई पहचान देंगी। यह इलाका आने वाले समय में श्रद्धा, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक पर्यटन का साझा केंद्र बनेगा। पटना के नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गंगा तट केवल एक नदी किनारा नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक चेतना और भविष्य की संभावनाओं का प्रतीक बनकर उभरेगा।

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