मधेपुरा में रिश्वत लेते दारोगा गिरफ्तार, निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई

  • जमीन विवाद में रिपोर्ट पक्ष में देने के लिए मांगे थे सात हजार रुपये
  • जाल बिछाकर रंगेहाथ पकड़ा गया, पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया

मधेपुरा। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुरैनी थाना के एक उपनिरीक्षक को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पुलिस अधिकारी की पहचान अनिल कुमार सिंह के रूप में हुई है, जो जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में जांच रिपोर्ट पक्ष में देने के बदले सात हजार रुपये की मांग कर रहा था। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, औराय निवासी वशिष्ठ कुमार वर्मा ने अपने जमीन विवाद के मामले में 20 मार्च को अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय में आवेदन देकर पुलिस जांच की मांग की थी। इस आवेदन के आधार पर संबंधित थाना अध्यक्ष ने मामले की जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक अनिल कुमार सिंह को सौंपी थी। आरोप है कि जांच के दौरान दारोगा ने रिपोर्ट को पीड़ित के पक्ष में देने के लिए सात हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। पीड़ित ने इस मांग से परेशान होकर निगरानी विभाग में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद विशेष निगरानी न्यायालय के आदेश पर एक धावा दल का गठन किया गया और आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई गई। मंगलवार की सुबह निगरानी विभाग की टीम मधेपुरा पहुंची और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। योजना के अनुसार पीड़ित को निर्धारित स्थान पर रिश्वत की रकम देने के लिए भेजा गया। जैसे ही उपनिरीक्षक ने सात हजार रुपये लिए, निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। निगरानी विभाग के उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए पूरी योजना के तहत कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता के सहयोग से आरोपी को थाना के पास स्थित चौक पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई पूरी तरह प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर की गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को तत्काल हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई। उसे पूछताछ के लिए पटना ले जाया जा रहा है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर किया है। हालांकि, निगरानी विभाग की सक्रियता से यह स्पष्ट हुआ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से आम जनता का भरोसा बढ़ता है और सरकारी अधिकारियों में जवाबदेही की भावना विकसित होती है। वहीं प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य सरकार लंबे समय से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है। निगरानी विभाग की यह कार्रवाई उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे यह संदेश गया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और निगरानी विभाग अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था।

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