वैश्विक तनाव से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1400 अंक टूटा

  • अमेरिकी बयान से बढ़ी अनिश्चितता, निवेशकों में घबराहट का माहौल
  • एशियाई बाजारों में भी कमजोरी, कच्चे तेल में उछाल और सोने में गिरावट

मुंबई। वैश्विक राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार पर दबाव बना रहा और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली तेज होती गई। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1403 अंकों की गिरावट के साथ 71,731 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि राष्ट्रीय शेयर बाजार का सूचकांक निफ्टी 431 अंक टूटकर 22,248 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
कमजोर शुरुआत से बढ़ी चिंता
कारोबार की शुरुआत भी कमजोर रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स 872 अंकों की गिरावट के साथ 72,262 पर खुला, जबकि निफ्टी 296 अंक नीचे 22,383 के स्तर पर खुला। शुरुआती गिरावट ने ही बाजार के रुख का संकेत दे दिया था। बाजार खुलते ही निवेशकों में बेचैनी का माहौल बन गया और धीरे-धीरे बिकवाली का दबाव बढ़ता चला गया।
अमेरिकी बयान से बढ़ी वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठा सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव की आशंकाएं बढ़ गई हैं, जिससे निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर
वैश्विक बाजारों से मिल रहे संकेत भी भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक रहे। गिफ्ट निफ्टी, जिसे भारतीय बाजार का शुरुआती संकेतक माना जाता है, गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। यह लगभग 22,356 के स्तर पर था, जो पिछले बंद स्तर से काफी नीचे था। इससे पहले ही संकेत मिल गए थे कि घरेलू बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं टॉपिक्स सूचकांक भी दबाव में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी तेज गिरावट के साथ नीचे आया। इन बाजारों में आई कमजोरी ने भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया।
अमेरिकी बाजारों का मिला-जुला असर
हालांकि, अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। डॉऊ जोंस औद्योगिक औसत, मानक एंड पुअर्स 500 और नैस्डैक सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद भारतीय और एशियाई बाजारों पर भू-राजनीतिक तनाव का असर अधिक भारी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। ब्रेंट कच्चा तेल करीब 5 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 106 डॉलर के आसपास पहुंच गया, जबकि पश्चिम टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल भी 104 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत मानी जाती है।
सोने में उतार-चढ़ाव
सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में हल्की तेजी के बाद इसमें गिरावट आ गई। ट्रंप के बयान के बाद सोने की कीमतों में करीब 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आम तौर पर वैश्विक तनाव के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव बना रहेगा, तब तक बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है। निवेशकों में फिलहाल सतर्कता का माहौल है और वे जोखिम भरे निवेश से बचने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार में आई इस गिरावट ने छोटे और बड़े दोनों निवेशकों को प्रभावित किया है।
आने वाले दिनों की दिशा
गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव भरा साबित हुआ है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और नीतिगत फैसले बाजार की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें और सोच-समझकर निवेश करें। वैश्विक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर दिखाई दिया है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां किस तरह घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकती हैं और निवेशकों की धारणा को बदल सकती हैं।

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