बिहार में सरकार गठन को लेकर अंतिम दौर की कवायद, 48 घंटे में नए मुख्यमंत्री पर फैसला संभव
- ललन सिंह और नीतीश कुमार की बैठक में रणनीति पर मंथन, उपमुख्यमंत्री के नाम पर भी चर्चा
- निशांत कुमार ने उपमुख्यमंत्री पद से किया इंकार, 14 अप्रैल को इस्तीफा और 15 को शपथ ग्रहण की तैयारी
पटना। बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और संकेत मिल रहे हैं कि अगले 48 घंटों में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। हालांकि अभी भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि राज्य की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी। राजधानी पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर सोमवार को गतिविधियां तेज हो गईं, जहां केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से जाना जाता है, ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सरकार गठन की रणनीति, मंत्रिमंडल के स्वरूप और राजनीतिक समीकरणों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से लौटने के बाद ललन सिंह ने उत्तर प्रदेश में पूजा-अर्चना की और फिर सीधे पटना पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच नई सरकार के गठन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। बताया जा रहा है कि आज की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर अंतिम सहमति बन सकती है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में यह भी तय किया जा सकता है कि जनता दल यूनाइटेड की ओर से उपमुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा और किन नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा। मंत्रिमंडल के आकार, जातीय और राजनीतिक संतुलन तथा नए और पुराने चेहरों के समावेश को लेकर भी गहन मंथन जारी है। इसी बीच मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार द्वारा उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार किए जाने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि निशांत कुमार फिलहाल सक्रिय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी लेने के पक्ष में नहीं हैं और अगले एक वर्ष तक राज्य भ्रमण करने की इच्छा रखते हैं। हालांकि, पार्टी का एक वर्ग उन्हें इस भूमिका के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। यदि निशांत कुमार इस पद को स्वीकार नहीं करते हैं, तो जनता दल यूनाइटेड की ओर से दो अलग-अलग सामाजिक वर्गों से उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पर अंतिम निर्णय भी जल्द लिया जा सकता है। 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की अंतिम बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना है, जिससे मौजूदा सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनकी उपस्थिति में विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। सूत्रों के मुताबिक, 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा की जा सकती है और उसी दिन शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित होने की संभावना है। इस समारोह में कई वरिष्ठ नेताओं और विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है, जिसके मद्देनजर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्ता परिवर्तन बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है। नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य की नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें मुख्यमंत्री आवास पर हो रही बैठकों और आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दो दिनों में न केवल नए मुख्यमंत्री का नाम सामने आएगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा भी स्पष्ट हो जाएगी।


