February 24, 2026

राम मंदिर में 25 नवंबर तक आम श्रद्धालुओं की एंट्री बैन, ध्वजारोहण समारोह को लेकर निर्देश जारी

लखनऊ। अयोध्या में आयोजित होने जा रहे ध्वजारोहण समारोह को देखते हुए प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आगामी 25 नवंबर को राम मंदिर परिसर में केवल आमंत्रित अतिथियों को ही प्रवेश दिया जाएगा, जबकि आम श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक रहेगी। इसके अलावा 24 नवंबर को भी मंदिर में सामान्य प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय सुरक्षा, व्यवस्था और कार्यक्रम की महत्ता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
प्रशासन का निर्णय और सुरक्षा व्यवस्था
क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने जानकारी देते हुए कहा कि ध्वजारोहण कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, इसलिए भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। 25 नवंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में कई संत-महंतों, धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों और विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इस दिन आम श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। पुलिस और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि केवल अधिकृत व्यक्ति ही परिसर में प्रवेश कर सकें।
24 नवंबर को भगवा ध्वज फहराने का कार्यक्रम
नगर निगम के तत्वावधान में आयोजित संतों और महंतों की बैठक में यह तय हुआ कि ध्वजारोहण से एक दिन पहले, यानी 24 नवंबर को अयोध्या के सभी मठों और मंदिरों पर भगवा ध्वज फहराया जाएगा। यह कार्यक्रम राम मंदिर की पूर्णता और आगामी समारोह के स्वागत का प्रतीक होगा। इसके साथ-साथ दीपोत्सव की भांति प्रकाश सज्जा कर पूरे अयोध्या नगरी को भव्यता से सजाने का निर्णय भी लिया गया है।
23 नवंबर को स्वच्छता और जागरूकता अभियान
संतों ने यह भी निर्णय लिया कि 23 नवंबर को रामपथ पर भ्रमण कर स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं को स्वच्छता अपनाने तथा प्लास्टिक मुक्त अयोध्या बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह कार्यक्रम अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक गरिमा को बढ़ाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री के संभावित आगमन से पहले शहर को और अधिक स्वच्छ व सुंदर बनाने की तैयारी का भी हिस्सा है। संत समाज का कहना है कि स्वच्छता को आध्यात्मिकता का आधार माना गया है, और इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।
दीपोत्सव की तरह विशेष प्रकाश व्यवस्था
बैठक में यह भी तय किया गया कि ध्वजारोहण समारोह की पूर्व संध्या पर पूरे शहर में दीपोत्सव जैसी सजावट की जाएगी। अयोध्या की सड़कों, मंदिरों, घाटों और प्रमुख स्थलों पर दीयों और विद्युत लाइटों के माध्यम से भव्य प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। यह आयोजन राम मंदिर निर्माण की पूर्णता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, इसलिए इसे मनाने के लिए विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है।
महापौर का संदेश और संत समाज की भूमिका
नगर निगम के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने बैठक में कहा कि अयोध्या ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने संतों और धार्मिक संस्थाओं से विशेष सहयोग की अपील की, क्योंकि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के आने की संभावना है और ऐसे में पूरे नगर की स्वच्छता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक वातावरण और स्वच्छता अभियान को साथ लेकर चलने से अयोध्या धाम की छवि और भी निखरेगी।
नगर निगम की तैयारियाँ
नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बैठक में स्वच्छता अभियान की योजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि शहर में सफाई, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, सड़क धुलाई, और प्रमुख मार्गों की सजावट का काम तेजी से जारी है। खासकर रामपथ, सरयू घाट, जन्मभूमि परिसर के आसपास और रेलवे स्टेशन–बस स्टैंड जैसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अपर आयुक्त नागेंद्र नाथ ने बैठक का संचालन किया और सभी विभागों के समन्वय का आश्वासन दिया।
भीड़ प्रबंधन की चुनौती
प्रशासन के अनुसार 24 और 25 नवंबर को श्रद्धालुओं की भीड़ को मंदिर परिसर से दूर रखना एक बड़ी चुनौती होगी। पुलिस ने इसके लिए आवश्यक तैयारी कर ली है। शहर के प्रमुख चौराहों, प्रवेश मार्गों और पार्किंग स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा सुरक्षा जांच को और कड़ा किया जाएगा ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति मंदिर परिसर के आसपास न पहुंच सके।
श्रद्धालुओं से की गई अपील
प्रशासन और संत समाज ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे 24 और 25 नवंबर को मंदिर आने का प्रयास न करें और घरों से ही मंदिर की परंपराओं का सम्मान करते हुए पूजा-अर्चना करें। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक प्रतिबंध केवल दो दिनों के लिए है और इसके बाद नियमित दर्शन पूर्ववत जारी रहेंगे। ध्वजारोहण समारोह अयोध्या और राम मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है। कार्यक्रम को भव्य और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने के लिए प्रशासन, नगर निगम और संत समाज मिलकर व्यापक तैयारी कर रहे हैं। आम श्रद्धालुओं से दो दिनों के लिए प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने का निर्णय व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है। इन तैयारियों के साथ अयोध्या एक बार फिर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है।

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