February 26, 2026

इंदौर में गंदा पानी बनी महामारी: 3200 से अधिक मरीज, केंद्र सरकार ने भेजी टीम

इंदौर। इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त की गंभीर समस्या ने महामारी जैसी स्थिति पैदा कर दी है। बीते कुछ दिनों में ही यहां 3200 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर इसका असर सबसे अधिक देखा जा रहा है। कई परिवारों में एक साथ सभी सदस्य बीमार हो गए, जिससे पूरे इलाके में भय और असहायता का माहौल बन गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतने कम समय में किसी एक सीमित क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर बीमारी का फैलना राज्य के लिए असाधारण और चिंताजनक स्थिति है।
दूषित पानी बना बीमारी की जड़
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि इलाके की पेयजल पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण सीवेज का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। इसी दूषित पानी के सेवन से फीकल कोलिफॉर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया लोगों के शरीर में पहुंचे, जिससे डायरिया और उल्टी-दस्त का संक्रमण तेजी से फैला। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से पानी का रंग और गंध बदला हुआ था, लेकिन समय रहते समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका नतीजा अब पूरे इलाके को भुगतना पड़ रहा है।
मरीजों की बढ़ती संख्या और मौतों पर विवाद
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 3200 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से कई को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घरों में ही इलाज करा रहे हैं। मौतों के आंकड़े को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड में 6 से 7 मौतों की पुष्टि की गई है, लेकिन स्थानीय लोगों और कुछ स्वतंत्र रिपोर्टों का दावा है कि यह संख्या 15 से 17 तक हो सकती है। इनमें एक 6 महीने के मासूम की मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। इस असमंजस ने प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की खाई को और गहरा कर दिया है।
केंद्र और राज्य की टीमें मौके पर तैनात
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार की कई विशेषज्ञ टीमें भागीरथपुरा पहुंच चुकी हैं। कोलकाता स्थित राष्ट्रीय जीवाणु अनुसंधान संस्थान, राज्य एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम और AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञ पिछले चार दिनों से क्षेत्र में डटे हुए हैं। ये टीमें पानी के नमूनों, मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट और पूरे जल आपूर्ति तंत्र की जांच कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल बीमारी के कारणों का पता लगाना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
15 दिन तक निगरानी में रहेगा इलाका
स्टेट सर्विलांस की टीम अगले 15 दिनों तक इस क्षेत्र में सक्रिय रहेगी। इस दौरान यह लगातार निगरानी की जाएगी कि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पानी की आपूर्ति हो रही है या नहीं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि जब तक पूरी तरह स्वच्छ पानी की सप्लाई सुनिश्चित नहीं होती, तब तक मरीजों की संख्या में कमी आना मुश्किल है। इसी कारण जल आपूर्ति व्यवस्था की मरम्मत और वैकल्पिक स्वच्छ जल की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
इस प्रकोप के चलते स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भारी दबाव पड़ रहा है। सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को अतिरिक्त शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है। कई जगहों पर अस्थायी चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके। दवाओं, ओआरएस और जरूरी इंजेक्शनों की आपूर्ति बढ़ाई गई है।
प्रशासन की चुनौतियां और जिम्मेदारी
यह संकट प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। एक ओर मरीजों की देखभाल और बीमारी पर नियंत्रण की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर जनता में भरोसा बनाए रखने की भी जरूरत है। पानी की सप्लाई लाइन की मरम्मत, टैंकरों से शुद्ध पानी की व्यवस्था और नियमित जांच जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर पहले ही पाइपलाइन की नियमित जांच होती, तो हालात इतने खराब नहीं होते।
विशेषज्ञों की चेतावनी और भविष्य की तैयारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जल और सीवेज लाइनों का आपस में मिलना एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। यदि समय-समय पर निगरानी और रखरखाव न किया जाए, तो ऐसे जलजनित रोग भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। इंदौर की यह घटना अन्य शहरों के लिए चेतावनी है कि स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। भागीरथपुरा में फैली यह महामारी केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा सबक है। केंद्र और राज्य की टीमें हालात पर काबू पाने की कोशिश में जुटी हैं, लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव है जब जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जाए। फिलहाल पूरे शहर और खासकर प्रभावित इलाके की निगाहें प्रशासन और विशेषज्ञ टीमों पर टिकी हैं, ताकि जल्द से जल्द हालात सामान्य हो सकें और लोगों को इस संकट से राहत मिल सके।

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