देश में 17 अप्रैल से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, तकनीक के सहारे जुटेगी हर घर की जानकारी

  • दो चरणों में पूरा होगा अभियान, पहले मकानों की गणना फिर घर-घर जाकर होगी जानकारी संग्रह
  • जियो टैगिंग और डिजिटल मैपिंग से जुड़ेगा हर घर, विकास योजनाओं में मिलेगा सटीक डेटा

नई दिल्ली। देश में होने वाली जनगणना को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और 17 अप्रैल से इसका पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास रहने वाली है, क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल रूप में आयोजित किया जा रहा है। यानी अब पारंपरिक कागज-कलम के बजाय मोबाइल अनुप्रयोग और आधुनिक तकनीक के माध्यम से हर घर की जानकारी एकत्र की जाएगी। सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस नई व्यवस्था से जनगणना प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी पहले की तुलना में अधिक बेहतर रहने की उम्मीद है। डिजिटल माध्यम के उपयोग से डेटा संग्रहण, विश्लेषण और भंडारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी। इस बार जनगणना अभियान को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण 17 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा, जिसमें मकानों की गणना और सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। इस दौरान नागरिकों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे स्वयं मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इससे प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और डेटा संग्रहण में तेजी आएगी। दूसरा चरण 2 मई से 31 मई तक चलेगा, जिसमें नियुक्त अधिकारी घर-घर जाकर लोगों से सीधे जानकारी एकत्र करेंगे। इस चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य से संबंधित विस्तृत जानकारी ली जाएगी, ताकि देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि किसी भी परिवार की संपूर्ण तस्वीर सामने आ सके। अधिकारियों द्वारा परिवार की संरचना से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे, जैसे घर में कुल कितने सदस्य रहते हैं, परिवार का मुखिया कौन है, मकान स्वामित्व वाला है या किराए का, घर में कितने कमरे हैं और कितने विवाहित जोड़े साथ रहते हैं। इन प्रश्नों के माध्यम से परिवार के जीवन स्तर और रहने की स्थिति को समझने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा, घर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें पेयजल का स्रोत क्या है, क्या पानी घर के भीतर उपलब्ध है, बिजली की स्थिति कैसी है, शौचालय की सुविधा है या नहीं, गंदे पानी की निकासी कैसे होती है, स्नान और रसोई की सुविधा उपलब्ध है या नहीं—जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी ली जाएगी। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि खाना बनाने के लिए किस प्रकार के ईंधन का उपयोग किया जाता है और क्या रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध है। सरकार का मानना है कि इस व्यापक डेटा का उपयोग भविष्य में विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में बच्चों की संख्या अधिक पाई जाती है, तो वहां स्कूल, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। वहीं जिन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी होगी, वहां सरकारी योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। इस बार की जनगणना में जियो टैगिंग और डिजिटल मानचित्रण का भी उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से हर घर और क्षेत्र की सटीक भौगोलिक स्थिति दर्ज की जाएगी। इससे न केवल योजनाओं को सही स्थान तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में राहत और बचाव कार्य भी अधिक तेज और प्रभावी तरीके से किए जा सकेंगे। जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और शिक्षकों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा किया जा सके। डिजिटल जनगणना देश के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे विकास योजनाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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