हनुमान जयंती पर महावीर मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़, विशेष तैयारी पूरी

  • फूलों से सजा दरबार, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक मशीन लगाई गई
  • चैत्र पूर्णिमा पर विशेष योग-नक्षत्र का संयोग, श्रद्धालु करेंगे पूजा-पाठ और व्रत

पटना। चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर इस वर्ष हनुमान जयंती विशेष संयोग में मनाई जा रही है। हस्त नक्षत्र और ध्रुव योग में पड़ने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर में इस मौके पर विशेष तैयारी की गई है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। हनुमान जयंती को लेकर महावीर मंदिर को आकर्षक ढंग से फूलों से सजाया गया है। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया है और पूरे दिन भारी भीड़ रहने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आएंगे। भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। सरकारी और निजी सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए विशेष मार्ग निर्धारित किए गए हैं और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की भी तैनाती की गई है। महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि इस बार भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। इसके तहत बेंगलुरु से एक विशेष हेड काउंटिंग मशीन मंगाई गई है, जो मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का आंकलन करेगी। इस मशीन को स्थापित किया जा रहा है, ताकि अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में उचित प्रबंधन किया जा सके। इसके अलावा, गर्मी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में 80 टन क्षमता वाली वातानुकूलन मशीन भी लगाई गई है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत प्रदान करना है, ताकि वे आराम से पूजा कर सकें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान हनुमान की पूजा विभिन्न रूपों में की जाती है। श्रीराम कथा के संदर्भ में उन्हें रुद्रावतार और एकमुखी हनुमान के रूप में पूजा जाता है, जबकि अन्य परंपराओं में पंचमुखी हनुमान की आराधना का भी विशेष महत्व है। हनुमान जयंती के दिन भक्त विशेष रूप से हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। चैत्र पूर्णिमा को हिन्दू नववर्ष की पहली पूर्णिमा भी माना जाता है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन हस्त नक्षत्र का प्रभाव शाम 4 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद चित्र नक्षत्र प्रारंभ होगा। वहीं, ध्रुव योग दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद व्याघात योग प्रभावी होगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि सुबह 6 बजकर 39 मिनट तक है, लेकिन उदय तिथि के अनुसार पूरे दिन पूर्णिमा का ही महत्व रहेगा। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त सत्यनारायण की कथा और पूजा भी करते हैं। पूजा की शुरुआत सूर्य देव को  जल अर्पित कर की जाती है। इसके बाद भक्त हनुमान जी को तेल और सिंदूर का लेप लगाते हैं, ध्वज अर्पित करते हैं और रोट प्रसाद का भोग लगाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और निर्धारित नियमों का पालन करें। सुरक्षा और सुविधा के सभी इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा कर सकें। इस बार की हनुमान जयंती धार्मिक आस्था, विशेष संयोग और आधुनिक व्यवस्था के संगम के रूप में मनाई जा रही है, जहां श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान हनुमान की आराधना करेंगे।

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